Friday, 13 March 2026

रेट की कार्यप्रणाली पर हाईकोर्ट सख्त, आदेश में हेराफेरी के आरोपों पर रजिस्ट्रार से मांगा स्पष्टीकरण


रेट की कार्यप्रणाली पर हाईकोर्ट सख्त, आदेश में हेराफेरी के आरोपों पर रजिस्ट्रार से मांगा स्पष्टीकरण

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जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण (रेट) की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने रेट की कार्यशैली पर लगाए गए आरोपों को गंभीर मानते हुए रेट के रजिस्ट्रार से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है।

यह आदेश अदालत ने श्रवण लाल खोवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ट्रिब्यूनल के आदेश में हेराफेरी की गई है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता युवराज सामंत ने अदालत को बताया कि ट्रिब्यूनल में सुनवाई के दौरान न्याय प्रक्रिया के साथ गंभीर खिलवाड़ हुआ है।

अदालत को बताया गया कि रेट ने ओपन कोर्ट में याचिकाकर्ता के पक्ष में स्टे दिया था, लेकिन बाद में किसी अन्य दिन की सुनवाई दर्शाते हुए लिखित आदेश में स्टे देने से इनकार कर दिया गया।

याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता श्रवणलाल खोवाल को जुलाई 2026 में व्याख्याता पद पर पदोन्नति दी गई थी, लेकिन जून 2025 में राज्य सरकार ने उनकी पदोन्नति को रद्द कर दिया। इसके खिलाफ उन्होंने रेट में याचिका दायर की थी। रेट ने 15 जुलाई 2025 को सुनवाई के बाद पदोन्नति रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी थी।

ट्रिब्यूनल की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उस समय स्टे दिए जाने का उल्लेख था। हालांकि बाद में याचिकाकर्ता को 8 अगस्त 2025 का लिखित आदेश मिला, जिसमें स्टे देने से मना कर दिया गया था।

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि 8 अगस्त को उनका मामला ट्रिब्यूनल में सूचीबद्ध ही नहीं था। ऐसे में बिना केस लिस्ट हुए आदेश जारी होना गंभीर सवाल खड़े करता है। याचिका में इस आदेश को अवैध और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की गई है।

हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही रेट के रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि वे शपथपत्र प्रस्तुत कर लगाए गए आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करें। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

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