Friday, 13 March 2026

रवीन्द्र मंच को बचाने के लिए कलाकारों की पहल, 15 मार्च को होगा नाटक ‘जामुन का पेड़’ का विशेष मंचन


रवीन्द्र मंच को बचाने के लिए कलाकारों की पहल, 15 मार्च को होगा नाटक ‘जामुन का पेड़’ का विशेष मंचन

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

जयपुर। कभी शहर की सांस्कृतिक धड़कन माना जाने वाला जयपुर का ऐतिहासिक रवीन्द्र मंच आज बदहाली और उपेक्षा का शिकार नजर आ रहा है। जर्जर दीवारें, छतों में दरारें, टपकते छज्जे, खराब वॉशरूम और टूटे दरवाजे इस सांस्कृतिक धरोहर की मौजूदा स्थिति को बयां कर रहे हैं। ऐसे हालात के बीच जयपुर के वरिष्ठ कलाकार अब इस मंच की खामोशी तोड़ने के लिए आगे आए हैं। शहर की रंग-शिल्प नाट्य संस्था ने निर्णय लिया है कि वह अपने चर्चित नाटक “जामुन का पेड़” की 13वीं प्रस्तुति रवीन्द्र मंच के मुख्य सभागार में करेगी। यह विशेष प्रस्तुति 15 मार्च को शाम 7 बजे आयोजित होगी और इसे पूरी तरह रवीन्द्र मंच को समर्पित किया जाएगा। कलाकारों का कहना है कि यह केवल एक नाटक का मंचन नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के लिए एक प्रतीकात्मक पहल है।

यह नाटक मशहूर साहित्यकार कृष्ण चंदर की प्रसिद्ध कहानी पर आधारित है, जिसका नाट्य रूपांतरण नीरज गोस्वामी ने किया है और निर्देशन गुरमिंदर सिंह पुरी ‘रोमी’ कर रहे हैं। इस प्रस्तुति की खास बात यह है कि इसमें अभिनय करने वाले लगभग 70 प्रतिशत कलाकारों की उम्र 70 वर्ष से अधिक है। यानी जिन वरिष्ठ कलाकारों ने कभी इसी मंच पर अपने अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया था, वे अब इस मंच के पुनर्जीवन की अपील लेकर फिर से उसी मंच पर उतरेंगे। नाटक में नीरज गोस्वामी, ईश्वर दत्त माथुर, राजेन्द्र शर्मा ‘राजू’, मोइनुद्दीन खान, गुरमिंदर सिंह पुरी ‘रोमी’, अशोक महेश्वरी, आलोक चतुर्वेदी, जीतू, दीपक कथूरिया, धनराज दाधीच, यादवेन्द्र आर्य ‘याद’ और श्रेया गोठवाल सहित कई कलाकार अभिनय करेंगे। वहीं मशहूर शायर लोकेश कुमार सिंह ‘साहिल’ भी इस प्रस्तुति में एक छोटे से किरदार में नजर आएंगे।

कलाकारों का कहना है कि रवीन्द्र मंच कभी जयपुर के सांस्कृतिक जीवन का केंद्र हुआ करता था, जहां नाटक, संगीत, कविता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की गूंज से शहर की पहचान बनती थी। लेकिन समय के साथ इसकी देखरेख में कमी आने के कारण यह भवन जर्जर स्थिति में पहुंच गया है। यहां तक कि भवन में लगे तांबे के पाइप चोरी हो चुके हैं और कई एसी मशीनें भी खराब पड़ी हैं। ऐसे में वरिष्ठ कलाकारों द्वारा किया जा रहा यह मंचन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक भावनात्मक संदेश भी है कि अगर समय रहते इस ऐतिहासिक प्रेक्षागृह की सुध नहीं ली गई तो जयपुर अपनी एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर खो सकता है।

Previous
Next

Related Posts