



जयपुर। राजस्थान विधानसभा में सोमवार को बहस के बाद राजस्थान आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय, अजमेर विधेयक 2026 को पारित कर दिया गया। इस विश्वविद्यालय की स्थापना का उद्देश्य आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की शिक्षा, शोध और प्रशिक्षण को बढ़ावा देना है।
विधानसभा में शून्य काल के बाद उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने राजस्थान आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय, अजमेर विधेयक 2026 को चर्चा और पारित करने के लिए प्रस्ताव रखा। इस विधायक पर चर्चा की शुरुआत कांग्रेस के डूंगर राम गेदर की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को शोध के लिए अलग से फंड दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भवन और जमीन आवंटित नहीं की गई है और विद्यालय खोलने की घोषणा कर दी गई है।
कांग्रेस के विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि जोधपुर में पहले से ही आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय खुला हुआ है तो फिर यह दूसरे विश्वविद्यालय को खोलने की क्या जरूरत है। उन्होंने कहा कि बजट का प्रावधान नहीं किया गया है ऐसे में विश्वविद्यालय का जो में ही रहेगा।कांग्रेस के विधायक नरेंद्र बुडानिया ने कहा कि नया विश्वविद्यालय खुलने का तो मैं समर्थन करता हूं। उन्होंने कहा कि इसके लिए पर्याप्त बजट दिया जाना चाहिए।
भाजपा की विधायक अनीता भदेल ने कहा कि अजमेर में नया राजस्थान आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय खोलने के विधेयक का प्रस्ताव का मैंसमर्थन करती हूं। उन्होंने कहा कि यह सरकारी विश्वविद्यालय प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा प्रदान करेगा। उन्होंने सरकार सेइसे प्राप्त बजट देने की मांग की। भाजपा की विधायक सुभाष मील और फूलचंद मीणा ने भी इसका समर्थन किया।
राष्ट्रीय लोकदल के विधायक सुभाष गर्ग ने राजस्थान आयुष विश्वविद्यालय, अजमेर करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए 100 करोड़ का बजट रखा जाना चाहिए।
यह विधेयक इससे पहले 5 मार्च 2026 को विधानसभा में पेश किया था। विधेयक पर हुई चर्चा के दौरान कई विधायकों ने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय का नाम आयुष विश्वविद्यालय रखा जाए, ताकि आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी सभी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को एक व्यापक मंच मिल सके।
सरकार का मानना है कि इस विश्वविद्यालय के माध्यम से प्रदेश में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को संस्थागत मजबूती मिलेगी और शोध एवं प्रशिक्षण के नए अवसर उपलब्ध होंगे। इससे आयुष क्षेत्र में शिक्षा और चिकित्सा सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।