Saturday, 07 March 2026

अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में देरी से पंचायत चुनाव पर संकट, हाईकोर्ट की 15 अप्रैल की समय सीमा पर उठे सवाल,आयोग ने मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को लिखा पत्र


अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में देरी से पंचायत चुनाव पर संकट, हाईकोर्ट की 15 अप्रैल की समय सीमा पर उठे सवाल,आयोग ने मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को लिखा पत्र

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

जयपुर। राजस्थान में पंचायत चुनावों को लेकर अनिश्चितता बढ़ती नजर आ रही है। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग की रिपोर्ट में देरी के कारण इस समयसीमा का पालन करना मुश्किल दिखाई दे रहा है। आयोग का कहना है कि पंचायतवार जनसंख्या और आरक्षण से जुड़े जो आंकड़े उपलब्ध कराए गए हैं, वे अपूर्ण और त्रुटिपूर्ण हैं, जिसके आधार पर वार्ड पंच पदों के लिए OBC आरक्षण तय करना संभव नहीं हो पा रहा है।

OBC आयोग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) ने मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को पत्र लिखकर बताया है कि जनाधार प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में गंभीर त्रुटियां हैं। आयोग के अनुसार 403 ग्राम पंचायतों में कुल जनसंख्या और OBC जनसंख्या शून्य दिखाई गई है, जबकि 118 पंचायतों में कुल जनसंख्या 1 से 500 और 266 पंचायतों में 501 से 1000 तक दर्शाई गई है। यह आंकड़े वास्तविकता से मेल नहीं खाते, क्योंकि पंचायतीराज विभाग के निर्देशों के अनुसार किसी पंचायत का गठन 1200 से अधिक जनसंख्या पर ही किया जाता है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार के गलत और अधूरे आंकड़ों के आधार पर पंचायतों में OBC सीटों का आरक्षण निर्धारित करना संभव नहीं है। इसलिए सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी कर सही और पूर्ण जानकारी आयोग को उपलब्ध कराने की जरूरत बताई गई है। आयोग ने यह भी कहा है कि पंचायतवार कुल जनसंख्या, OBC जनसंख्या तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण से संबंधित स्पष्ट आंकड़े अभी तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

आयोग के अनुसार पंचायतीराज विभाग को इस संबंध में जानकारी देने के बावजूद 24 फरवरी 2026 तक भी आवश्यक डेटा नहीं मिला है। इस स्थिति को शासन सचिव, पंचायतीराज विभाग के संज्ञान में भी लाया जा चुका है। अब बड़ा सवाल यह है कि यदि आयोग को सही आंकड़े समय पर नहीं मिलते हैं तो वह 31 मार्च तक अपनी रिपोर्ट सरकार को कैसे सौंप पाएगा। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि आयोग समय की कमी का हवाला देकर सरकार से अपने कार्यकाल में एक बार फिर विस्तार मांग सकता है, जिससे पंचायत चुनाव की प्रक्रिया और आगे खिसक सकती है।

Previous
Next

Related Posts