



जयपुर। ग्राम सेवा सहकारी समितियों (जीएसएस) में मैनेजरों की नियुक्ति में कथित अनियमितताओं के मामले में सरकार ने पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना के खिलाफ जांच की मंजूरी दे दी है। इस मामले में पहले ही सहकारी सेवा के कुछ अधिकारियों के खिलाफ जांच की अनुमति दी जा चुकी है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि सहकारिता विभाग ने अपनी प्राथमिक जांच में कुछ अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही पाया है। वर्ष 2022-23 में ग्राम सेवा सहकारी समितियों में मैनेजर और सहायक मैनेजर के पदों पर हुई नियुक्तियों में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि जिला और खंड स्तर पर गठित स्क्रीनिंग कमेटियों ने नियमों को दरकिनार करते हुए ऐसे उम्मीदवारों की नियुक्ति कर दी, जो निर्धारित पात्रता मानकों को पूरा नहीं करते थे। बताया जा रहा है कि करीब 1100 से अधिक नियुक्तियों में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने जांच की अनुमति के लिए प्रस्ताव राजभवन भेजा था। हालांकि प्रारंभ में यह कहा गया कि प्रस्ताव निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नहीं भेजा गया है। इसके बाद एसीबी ने दोबारा विभाग को प्रस्ताव भेजा। सहकारिता विभाग द्वारा अनुमति दिए जाने के बाद यह मामला फिर से राजभवन पहुंचा, जहां से जांच के लिए मंजूरी दे दी गई।
इस मामले में पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना का कहना है कि जिन अधिकारियों पर आरोप लगाए गए थे, उन्हें अदालत से राहत मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि यदि एसीबी इस मामले में आगे कोई कार्रवाई करती है तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। फिलहाल एसीबी इस पूरे मामले की जांच की तैयारी कर रही है और आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।