Thursday, 05 March 2026

बीकानेर की जर्जर सड़कों पर उठे सवाल, मनोहर चावला बोले— खड्डों में तब्दील सड़कें दे रही हैं हादसों को न्योता


बीकानेर की जर्जर सड़कों पर उठे सवाल, मनोहर चावला बोले— खड्डों में तब्दील सड़कें दे रही हैं हादसों को न्योता

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बीकानेर। शहर की बदहाल सड़कों को लेकर नागरिकों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ता मनोहर चावला ने प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीकानेर की कई प्रमुख और आंतरिक सड़कें अब इतनी खस्ताहाल हो चुकी हैं कि वे गहरे गड्ढों में तब्दील हो गई हैं और लोगों के लिए खतरा बनती जा रही हैं। उनका कहना है कि इन सड़कों की स्थिति ऐसी हो गई है मानो वे दुर्घटनाओं और मौत को निमंत्रण दे रही हों।

मनोहर चावला ने बताया कि सरकार बीकानेर पूर्व और पश्चिम क्षेत्र में सड़कों के निर्माण के लिए 15-15 करोड़ रुपये की स्वीकृति दे चुकी है। इसके तहत पूर्व क्षेत्र में 56 और पश्चिम क्षेत्र में 82 सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है, लेकिन इसके बावजूद सड़कों की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। कई सड़कों पर गहरे गड्ढे और कंकरीले पत्थर हैं, जिनसे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले दो से तीन वर्षों से वे प्रशासन का ध्यान इस समस्या की ओर दिला रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम, सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) और विकास प्राधिकरण जैसे संबंधित विभाग इस मामले में उदासीन नजर आ रहे हैं। शहर की कई प्रमुख सड़कें और गलियां जैसे रेलवे स्टेशन से कोयले वाली गली, डीआरएम कार्यालय जाने वाली सड़क, बी सेठिया लेन, वकीलों वाली गली, हेड पोस्ट ऑफिस से चौंखटियां जाने वाली सड़क, फड़ बाजार, पवनपुरी डुप्लेक्स कॉलोनी, संजय पार्क के पास की सड़क और जय नारायण व्यास कॉलोनी की सड़कें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। कई जगह गड्ढों में गंदा पानी भरा रहता है, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है और दोपहिया वाहन चालक अक्सर हादसों का शिकार हो रहे हैं।

चावला ने कहा कि सड़क निर्माण में ठेकेदारों की लापरवाही, भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री के उपयोग के कारण सड़कें थोड़ी सी बारिश में ही उखड़ जाती हैं या भारी वाहनों के दबाव से टूट जाती हैं। इसके बाद दुर्घटनाओं का सिलसिला शुरू हो जाता है, जिसमें कई परिवारों को अपूरणीय क्षति उठानी पड़ती है।

उन्होंने जिला कलेक्टर से अपील की है कि वे स्वयं अधिकारियों के साथ शहर का दौरा कर सड़कों की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करें और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह बनाएं। चावला का कहना है कि पहले भी दिवाली तक सड़क निर्माण के आदेश दिए गए थे, उसके बाद संभागीय आयुक्त और फिर शासन के प्रमुख सचिव ने होली तक सड़कों के निर्माण के निर्देश दिए, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए होली के मौके पर खस्ताहाल सड़कों के गड्ढों में रंग डालकर विरोध भी जताया। नागरिकों का कहना है कि जब तक प्रशासन और संबंधित विभाग गंभीरता से कार्रवाई नहीं करेंगे, तब तक शहर की सड़कें लोगों के लिए खतरा बनी रहेंगी।

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