



बाड़मेर जिले में पिछले कई वर्षों से क्रूड ऑयल का खनन तेज गति से जारी है। केयर्न वेदांता कंपनी द्वारा संचालित तेल क्षेत्रों में करीब 38 वेल साइट्स से प्रतिदिन 60,000 से अधिक बैरल क्रूड ऑयल का उत्पादन किया जा रहा है। इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 10 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है, लेकिन अब इस खनन गतिविधि के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कंपनी की अनदेखी और प्रशासन व संबंधित विभागों की लापरवाही के कारण क्षेत्र में पर्यावरणीय संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार क्षमता से अधिक किए जा रहे ब्लास्टिंग कार्यों के चलते कई स्थानों पर खेतों की जमीन प्रभावित हो रही है और अचानक जमीन से क्रूड ऑयल रिसाव की घटनाएं सामने आ रही हैं। वहीं, तेल उत्पादन स्थलों पर लगी बड़ी चिमनियों से निकलने वाली गैसें लगातार वातावरण में छोड़ी जा रही हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रासायनिक अपशिष्ट (केमिकल डंपिंग) के कारण क्षेत्र के कई कुओं और जल स्रोतों का पानी दूषित हो रहा है, जिससे पीने के पानी और कृषि दोनों पर असर पड़ रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों और ग्रामीणों का दावा है कि खनन क्षेत्र के आसपास वनस्पति और वन्यजीवों की संख्या में भारी कमी आई है। जिन इलाकों में पहले वन्यजीवों की मौजूदगी सामान्य थी, वहां अब उनका नामोनिशान तक नहीं दिखाई देता। लोगों का कहना है कि सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की बातें केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं, जबकि जमीन पर नियमों की अनदेखी करते हुए अंधाधुंध खनन किया जा रहा है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कंपनी और प्रशासनिक अधिकारी सीमित समय के लिए निरीक्षण करते हैं, लेकिन यहां स्थायी रूप से रहने वाले लोगों को प्रदूषण, स्वास्थ्य जोखिम और पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने चिंता जताई कि यदि समय रहते सख्त निगरानी और पर्यावरणीय नियंत्रण उपाय नहीं किए गए तो यह स्थिति आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट बन सकती है।
क्षेत्र के लोगों ने सरकार और पर्यावरणीय नियामक एजेंसियों से मांग की है कि खनन गतिविधियों की स्वतंत्र जांच कराई जाए, पर्यावरण मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए तथा जल, भूमि और जैव विविधता की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।