



जयपुर। सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग में हुए कथित हजारों करोड़ रुपये के घोटाले की जांच में देरी को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) पर कड़ी नाराजगी जताई है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कार्रवाई नहीं की जा रही है तो यह प्रतीत होता है कि भ्रष्टाचारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। अदालत ने एसीबी के उपमहानिरीक्षक (DIG) आनंद शर्मा को दो सप्ताह के भीतर प्रभावी कार्रवाई कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन की एकलपीठ में हुई, जहां डीआईजी आनंद शर्मा व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए और जांच के लिए अतिरिक्त समय मांगा। इस पर न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि विभाग को पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट ने सवाल उठाया कि शिकायतों में अपराध बनता है या नहीं और आरोपियों के खिलाफ जांच की वास्तविक स्थिति क्या है। डीआईजी द्वारा केवल फोन पर बात करने और जांच में समय लगने की बात कहने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई।
याचिकाकर्ता डॉ. टी.एन. शर्मा की ओर से अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी ने अदालत को बताया कि न्यायालय के आदेशों के बाद 27 विस्तृत शिकायतें दस्तावेजों सहित एसीबी को सौंपी गई थीं, लेकिन किसी भी मामले में प्रभावी जांच नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि एसीबी छोटे कर्मचारियों—जैसे क्लर्क, पटवारी, कांस्टेबल या सब-इंस्पेक्टर—के मामलों में तुरंत कार्रवाई करती है, लेकिन बड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई से बच रही है।
अदालत को यह भी बताया गया कि फरवरी माह में हाईकोर्ट ने डीआईजी को दो सप्ताह में कार्रवाई के निर्देश दिए थे, इसके बावजूद एक भी नई एफआईआर दर्ज नहीं की गई और न ही किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई। अधिवक्ता ने कहा कि कई मामलों में आरटीआई के जरिए जुटाए गए दस्तावेज भी एसीबी को दिए गए, लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ाई गई। एक मामले में तो आरोप है कि अधिकारी ने व्हाइटनर लगाकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कार्यादेशों को बढ़ाया, फिर भी एसीबी निष्क्रिय बनी रही।
न्यायालय ने सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जांच एजेंसियों की निष्क्रियता न्यायिक आदेशों की अवमानना के समान है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। हाईकोर्ट ने अब एसीबी को 9 मार्च तक ठोस कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।