Thursday, 26 February 2026

जयपुर में ‘द अम्रपाली कलेक्शन – सिल्वर एंड गोल्ड: विज़न्स ऑफ आर्केडिया’ पुस्तक का भव्य विमोचन, भारतीय आभूषण विरासत को मिला वैश्विक मंच


जयपुर में ‘द अम्रपाली कलेक्शन – सिल्वर एंड गोल्ड: विज़न्स ऑफ आर्केडिया’ पुस्तक का भव्य विमोचन, भारतीय आभूषण विरासत को मिला वैश्विक मंच

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जयपुर। जयपुर के प्रतिष्ठित आम्रपाली म्यूजियम में गुरुवार को भारतीय आभूषण परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित पुस्तक ‘द अम्रपाली कलेक्शन – सिल्वर एंड गोल्ड: विज़न्स ऑफ आर्केडिया’ का भव्य विमोचन समारोह आयोजित किया गया। आम्रपाली म्यूजियम के सहयोग से मैपिन पब्लिशिंग द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक को प्रख्यात आभूषण इतिहासकार डॉ. उषा आर. बालाकृष्णन ने लिखा है। पुस्तक का औपचारिक विमोचन डॉ. उषा आर. बालाकृष्णन और भारत की पहली म्यूज़ियम एडवाइजरी फर्म एका आर्काइविंग सर्विसेज़ के को-फाउंडर प्रमोद कुमार केजी ने किया। कार्यक्रम में आम्रपाली म्यूजियम के को-फाउंडर राजीव अरोड़ा, राजेश अजमेरा, मैपिन पब्लिशिंग के को-फाउंडर बिपिन शाह और म्यूजियम के सीईओ तरंग अरोड़ा सहित कला एवं संस्कृति जगत की कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम की शुरुआत आम्रपाली म्यूजियम के विशेष भ्रमण से हुई, जहां अतिथियों ने भारत की पारंपरिक आभूषण धरोहर को करीब से देखा। इसके बाद पुस्तक का विमोचन किया गया तथा डॉ. उषा आर. बालाकृष्णन और प्रमोद कुमार केजी के बीच भारतीय आभूषण इतिहास, शिल्प परंपरा और सांस्कृतिक विरासत पर रोचक संवाद आयोजित हुआ। डॉ. बालाकृष्णन ने कहा कि यह पुस्तक भारत के ग्रामीण, घुमंतू और किसान समुदायों की जीवंत सांस्कृतिक पहचान का उत्सव है। उन्होंने बताया कि चांदी के आभूषण भारतीय समाज में स्वतंत्रता, प्रयोग और लोकतांत्रिक सौंदर्य का प्रतीक रहे हैं, जिन्हें आधुनिक समय में नई पहचान देने की आवश्यकता है।

आम्रपाली म्यूजियम के को-फाउंडर राजीव अरोड़ा ने कहा कि तेज़ी से बदलती दुनिया में पारंपरिक कारीगरों की कला और शिल्प को संरक्षित करना अत्यंत आवश्यक है। यह पुस्तक केवल एक प्रकाशन नहीं बल्कि भारतीय आभूषण विरासत को सुरक्षित रखने और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि पिछले चार दशकों में राजेश अजमेरा और उनकी टीम ने देशभर से दुर्लभ आभूषण संग्रहित कर उन्हें संरक्षित किया है, जो आज वैश्विक स्तर पर भारतीय शिल्पकला की पहचान बन चुके हैं।

विश्व के महत्वपूर्ण संग्रहों में शामिल ‘अम्रपाली कलेक्शन’ से प्रेरित यह पुस्तक पारंपरिक चांदी और सोने के आभूषणों की सौंदर्यात्मक, सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक यात्रा को प्रस्तुत करती है। 264 पृष्ठों और 331 आकर्षक फोटोग्राफ्स से सुसज्जित यह पुस्तक भारतीय उपमहाद्वीप के विभिन्न समुदायों, भाषाओं, आस्थाओं और जीवनशैली से जुड़ी आभूषण परंपराओं को विस्तार से दर्शाती है। इसमें प्रकृति और ब्रह्मांड से जुड़े तत्वों—जैसे शंख, सीप, हड्डी और घास—के उपयोग के माध्यम से पारंपरिक शिल्प की गहराई और रचनात्मकता को भी उजागर किया गया है।

यह प्रकाशन भारतीय हस्तकला, लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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