



राजस्थान विधानसभा में बजट बहस का जवाब देते हुए उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दीया कुमारी ने कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए कहा कि अब दो वर्ष की प्रशिक्षण अवधि के दौरान यदि किसी कर्मचारी का चयन केंद्र या राज्य की अन्य सरकारी नौकरी में हो जाता है और वह वर्तमान पद छोड़ता है, तो उससे वेतन-भत्तों की वसूली नहीं की जाएगी। इसके अलावा कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति तक बीमा कवर उपलब्ध कराने की भी घोषणा की गई, जिससे सेवा सुरक्षा को और मजबूत करने की बात कही गई।
वित्त मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार “खजाना खाली कर गई” और अब वर्तमान सरकार को सीख दे रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 4.4 प्रतिशत था, जबकि वर्तमान सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए इसे घटाकर 3.87 प्रतिशत रखने का लक्ष्य तय किया है। वर्ष 2026-27 में इसे और कम कर 3.69 प्रतिशत तक लाने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि सरकार राजस्व आय बढ़ाने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
दीया कुमारी ने कहा कि सरकार तथ्यात्मक आलोचना का स्वागत करती है, लेकिन अनावश्यक आलोचना से बचना चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि कम से कम उन्होंने बजट पढ़ तो लिया। उन्होंने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने अनजाने में ही पिछले बजट की प्रशंसा कर दी और इस बार उन्हें आलोचना के लिए कविताओं के अलावा ज्यादा मुद्दे नहीं मिले।
नेता प्रतिपक्ष द्वारा कृषि और शिक्षा बजट में कटौती के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए दीया कुमारी ने कहा कि राज्य का कृषि बजट कांग्रेस सरकार की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने विपक्ष से आंकड़े सही रखने की अपील की और कहा कि राजस्थान को पीछे किसने छोड़ा, यह इतिहास जानता है। उन्होंने दोहराया कि सरकार सबको साथ लेकर चलने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।
बजट बहस के इस जवाब के बाद सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। आने वाले दिनों में बजट से जुड़ी घोषणाओं के क्रियान्वयन पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।