



राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की योजनाओं की स्थिति ऐसी है कि मंत्रियों को भी उनके नाम याद नहीं रहते। जूली ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत केंद्र से मिले फंड का ब्यौरा मांगते हुए कहा कि इस वर्ष राजस्थान को कितना पैसा मिला, इसका स्पष्ट जवाब कोई नहीं दे रहा। उन्होंने जल जीवन मिशन में कथित अनियमितताओं और लंबी जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सवा दो साल जांच में निकाल दिए, लेकिन जनता को क्या लाभ मिला?
जूली ने ईआरसीपी (पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना) और रिफाइनरी परियोजना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अगस्त में उद्घाटन की बात कही गई थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वह इस साल का अगस्त था या अगले साल का। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि योजनाओं के नाम इतने बार बदले जा रहे हैं कि मंत्रियों को भी याद नहीं रहते।
नेता प्रतिपक्ष ने कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर करने में सरकार की कथित विफलता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चार लाख भर्तियों की बात की गई थी, लेकिन बजट में इसका कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। जूली ने कहा कि संभव है मुख्यमंत्री ने बड़ी घोषणाएं अपने जवाब के लिए बचाकर रखी हों। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के बीच समन्वय की कमी नजर आ रही है।
जूली ने दावा किया कि सरकार ने कृषि के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य का बजट भी घटा दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं और मरम्मत के लिए “ऊंट के मुंह में जीरे” जितना बजट दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट में सरकार ने स्कूलों की मरम्मत के लिए 20 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई थी, जबकि बजट में केवल 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। शिक्षा विभाग में लगभग 1.50 लाख पद खाली होने का मुद्दा भी उन्होंने उठाया।
राजकोषीय घाटे को कम करने के नाम पर विकास कार्यों में 40 प्रतिशत कटौती का आरोप लगाते हुए जूली ने कहा कि तीन वर्षों में सरकार 2.22 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। उन्होंने कहा कि “कर्ज लेने में पांच साल का काम दो साल में कर लिया।” जूली ने व्यंग्य करते हुए कहा कि सरकार “कर्ज लेकर घी पीने” वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है और भविष्य की सरकार पर बोझ डालने की तैयारी कर रही है।
जूली ने भाजपा विधायक बहादुर सिंह कोली की कथित लिंगभेदी टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि 16 फरवरी को बजट चर्चा के दौरान बेटा-बेटी में भेदभाव की बात कही गई, जो निंदनीय है। जूली ने कहा कि उनके भी दो बेटियां हैं और इस तरह की सोच आज के दौर में अस्वीकार्य है।
बजट बहस के दौरान लगाए गए इन आरोपों ने सदन का माहौल और अधिक गरमा दिया है। अब निगाहें सरकार के जवाब पर टिकी हैं कि इन आरोपों का किस प्रकार प्रतिवाद किया जाता है।