Sunday, 15 February 2026

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर उठाए सवाल, किसानों के भविष्य को लेकर जताई चिंता


लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर उठाए सवाल, किसानों के भविष्य को लेकर जताई चिंता

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नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रविवार को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पांच अहम सवाल पूछे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते के नाम पर भारतीय किसानों के हितों से समझौता किया जा रहा है। गांधी ने कहा कि यह केवल वर्तमान का मुद्दा नहीं, बल्कि देश की कृषि व्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि किसानों को स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत अपनी कृषि व्यवस्था पर किसी दूसरे देश की दीर्घकालिक पकड़ को स्वीकार कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (डीडीजी) के आयात पर प्रश्न खड़ा करते हुए पूछा कि क्या इसका अर्थ यह है कि भारतीय पशुओं को आनुवंशिक रूप से परिवर्तित अमेरिकी मक्का से बने चारे पर निर्भर किया जाएगा। इससे देश के डेयरी उत्पाद क्या अमेरिकी कृषि उद्योग पर निर्भर नहीं हो जाएंगे?

उन्होंने यह भी पूछा कि यदि आनुवंशिक रूप से परिवर्तित सोया तेल के आयात की अनुमति दी जाती है तो मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान सहित देशभर के सोया उत्पादक किसानों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। गांधी ने कहा कि पहले से ही कीमतों के उतार-चढ़ाव से जूझ रहे किसान एक और झटका कैसे सह पाएंगे।

गांधी ने ‘अतिरिक्त उत्पाद’ शब्द के दायरे पर भी सवाल उठाया और पूछा कि क्या भविष्य में दालों तथा अन्य फसलों को भी अमेरिकी आयात के लिए खोले जाने का दबाव बनाया जाएगा। उन्होंने गैर-व्यापार बाधाओं को हटाने की शर्त पर भी चिंता व्यक्त की और आशंका जताई कि क्या इससे भारत पर आनुवंशिक फसलों के संबंध में अपने रुख को नरम करने, सरकारी खरीद को कमजोर करने या न्यूनतम समर्थन मूल्य तथा बोनस में कटौती का दबाव डाला जाएगा।

अंत में राहुल गांधी ने सवाल किया कि यदि यह रास्ता एक बार खुल गया तो हर वर्ष इसे और व्यापक बनने से कैसे रोका जाएगा। क्या इसके लिए कोई स्पष्ट सुरक्षा प्रावधान होंगे या फिर धीरे-धीरे और अधिक फसलों को इस समझौते के दायरे में लाया जाएगा?

यह मुद्दा राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। सत्तापक्ष की ओर से अभी तक इन सवालों पर औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जबकि किसान संगठनों और कृषि विशेषज्ञों के बीच भी इस विषय पर बहस तेज हो गई है।

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