Monday, 09 February 2026

आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रण के लिए समन्वित कार्यवाही के निर्देश, आंकड़ों की मॉनिटरिंग हेतु एकीकृत पोर्टल बनेगा: वी. श्रीनिवास


आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रण के लिए समन्वित कार्यवाही के निर्देश, आंकड़ों की मॉनिटरिंग हेतु एकीकृत पोर्टल बनेगा: वी. श्रीनिवास

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जयपुर। प्रदेश में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने समन्वित और सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अनुपालना में सोमवार को शासन सचिवालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य सचिव ने आवारा कुत्तों की जनसंख्या नियंत्रण, नसबंदी और टीकाकरण से संबंधित सभी आंकड़ों के संकलन और निगरानी के लिए एक एकीकृत पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए, ताकि राज्यभर की स्थिति पर प्रभावी और नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा सके।

मुख्य सचिव ने बैठक में प्रदेश में संचालित एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटरों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उन क्षेत्रों और शहरी निकायों की पहचान की जाए, जहां आवश्यकता के अनुसार नए ABC सेंटर स्थापित किए जा सकें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आवारा कुत्तों की संख्या पर प्रभावी नियंत्रण तभी संभव है, जब सभी संबंधित विभाग, शहरी निकाय और पशु कल्याण संगठन आपसी समन्वय के साथ कार्य करें।

बैठक में मुख्य सचिव ने इस पूरे अभियान की निगरानी के लिए राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति के गठन के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही जिला स्तर पर नियमित और समयबद्ध समीक्षा बैठकों का आयोजन सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि जमीनी स्तर पर हो रहे कार्यों की प्रगति का आकलन किया जा सके। उन्होंने आमजन में जागरूकता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया और निर्देश दिए कि आवारा कुत्तों के टीकाकरण, नसबंदी और सुरक्षित व्यवहार को लेकर विशेष जनसंपर्क अभियान चलाए जाएं तथा सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।

बैठक में स्वायत्त शासन विभाग के शासन सचिव रवि जैन ने राज्य सरकार द्वारा अब तक किए गए प्रयासों की जानकारी दी और आगे की रणनीति पर सुझाव रखे। इस अवसर पर जिला कलेक्टर जितेन्द्र सोनी, नगर निगम आयुक्त गौरव सैनी, संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी तथा पशु कल्याण संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। बैठक में यह सहमति बनी कि सुव्यवस्थित डाटा, तकनीक आधारित निगरानी और विभागीय समन्वय से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।

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