



बहरोड़ के पूर्व विधायक बलजीत यादव को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को जयपुर स्थित विशिष्ट न्यायालय CBI संख्या तीन में पेश किया। ईडी अधिकारियों ने अदालत से यादव का रिमांड मांगा, जिसका उनके वकीलों ने कड़ा विरोध किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने बलजीत यादव को 3 दिन के ईडी रिमांड पर भेजने के आदेश दिए। मामले में अब 7 फरवरी को अगली पेशी होगी। जानकारी के अनुसार, ईडी बलजीत यादव को दोपहर 12:20 बजे कोर्ट लेकर पहुंची थी। इस दौरान अदालत में करीब 5 घंटे तक सुनवाई चली, जो शाम 4:50 बजे समाप्त हुई।
ईडी की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में आगे की पूछताछ आवश्यक है, जबकि बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी और रिमांड को अनुचित बताते हुए विरोध दर्ज कराया। कोर्ट के आदेश के बाद अब ईडी रिमांड अवधि के दौरान बलजीत यादव से पूछताछ करेगी।
ईडी अधिकारियों ने अदालत से पूछताछ के लिए यादव का रिमांड मांगा, जबकि उनकी ओर से पेश वकीलों ने रिमांड का कड़ा विरोध किया। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश खगेंद्र कुमार शर्मा के समक्ष हुई, जिन्होंने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। कोर्ट ने फिलहाल लंच के बाद आगे की सुनवाई निर्धारित की है।
कोर्ट में पेशी से पहले बलजीत यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बहरोड़ के वर्तमान विधायक जसवंत यादव अपने बेटे को विधायक बनाना चाहते हैं और इसी कारण उनके खिलाफ झूठा मामला बनाया गया है। यादव ने यह भी दावा किया कि उन्हें बिना किसी ठोस आधार के गिरफ्तार किया गया है।
ईडी के अनुसार, बलजीत यादव पर स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MLA LAD Fund) से 3 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के दुरुपयोग और गबन का आरोप है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है। ईडी ने उन्हें मंगलवार रात अलवर के शाहजहांपुर टोल प्लाजा से हिरासत में लिया था, जिसके बाद जयपुर स्थित ईडी कार्यालय में पूछताछ कर औपचारिक गिरफ्तारी की गई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ईडी से सवाल किया कि क्या इस मामले में पंचायत समिति के संबंधित अधिकारियों और उस व्यक्ति को भी अभियुक्त बनाया गया है, जिसके खाते में कथित तौर पर पैसा गया। इस पर बचाव पक्ष ने दलील दी कि जिस फर्म पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उससे बलजीत यादव का पहले से संपत्ति विवाद चल रहा है। वकीलों ने कहा कि टेंडर पंचायत समिति की ओर से अखबारों में प्रकाशित किए गए थे और उसमें यादव की कोई भूमिका नहीं थी।
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि ईडी के दावे तथ्यहीन हैं और यदि बलजीत यादव किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाते, तो शायद यह कार्रवाई नहीं होती। वकीलों का कहना था कि यादव ने हर बार ईडी को लिखित में सहयोग का आश्वासन दिया था, इसके बावजूद उनकी गिरफ्तारी की गई, जो अवैध है।
वहीं ईडी की ओर से अदालत में कहा गया कि बलजीत यादव ने खुद फर्जी फर्म बनवाकर सरकारी फंड को डायवर्ट किया। एजेंसी ने मामले में आगे की जांच के लिए 6 दिन की रिमांड मांगी है। ईडी ने यह भी बताया कि जनवरी 2025 में जयपुर, दौसा और बहरोड़ में यादव के कुल 10 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन किया गया था, जहां से महत्वपूर्ण दस्तावेज और सबूत बरामद हुए।
ईडी जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2021-22 में बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र के 32 सरकारी स्कूलों के लिए बैडमिंटन और क्रिकेट किट की खरीद के नाम पर करीब 3.72 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और बिना आपूर्ति भुगतान के आरोप हैं। इस मामले में पहले ही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) एफआईआर दर्ज कर चुका है, जिसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।