



राजस्थान विधानसभा में भरतपुर जिले के आवासहीन परिवारों से जुड़े सवाल पर मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ। प्रश्नकाल के दौरान इस मुद्दे पर संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। यूडीएच राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सरकार पर सवालों से बचने का आरोप लगाया।
विवाद की शुरुआत आरएलडी विधायक सुभाष गर्ग के सवाल से हुई, जिसमें उन्होंने भरतपुर में आवासहीन परिवारों की वास्तविक संख्या और प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र लाभार्थियों की जानकारी मांगी थी। यूडीएच राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा के जवाब में जब आवासहीन परिवारों की संख्या के बजाय योजना की पात्रता शर्तों पर चर्चा शुरू हुई, तो गर्ग ने आपत्ति जताई और कहा कि वे केवल “हां या ना” में स्पष्ट जवाब चाहते हैं।
सदन में बहस उस समय और तेज हो गई, जब यूडीएच राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि भूमिहीन परिवारों की संख्या चाहिए तो कलेक्टर से रिपोर्ट मंगवाकर दी जा सकती है। इस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने तंज कसते हुए कहा कि सदन में “एडवोकेट” की जरूरत नहीं होती। जवाब में संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि सवाल पूछने का अधिकार है, भाषण देने का नहीं। प्रतिपक्ष नेता जूली ने पलटवार करते हुए कहा कि सच्चाई बताने पर उन्हें भाषण देने का आरोप लगाया जा रहा है।
करीब 15 मिनट तक चले इस विवाद में परिभाषाओं पर भी बहस हुई। यूडीएच राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि जिसके पास जमीन नहीं है वह “बेघर” है, जबकि जिसके पास जमीन है लेकिन मकान नहीं है, वह “आवासहीन” कहलाता है। विपक्ष ने इसे मूल सवाल से भटकने की कोशिश बताया। उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के हस्तक्षेप पर भी विपक्ष ने आपत्ति जताई, हालांकि स्पीकर ने उन्हें बोलने की अनुमति दी।
आम रास्तों को रेवेन्यू रिकॉर्ड में दर्ज करने के सवाल का जवाब नहीं दे सके राजस्व मंत्री हेमंत मीणा
इसी दौरान प्रश्नकाल में राजस्व मंत्री हेमंत मीणा भी विपक्ष के सवालों में घिरते नजर आए। कांग्रेस विधायक पीतराम सिंह काला ने आम रास्तों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने को लेकर सीधा जवाब मांगा, लेकिन मंत्री नियमों और सर्कुलर का हवाला देते रहे। स्पीकर के बार-बार “हां या ना” में जवाब देने के निर्देश के बावजूद स्पष्ट उत्तर नहीं मिलने पर कांग्रेस विधायकों ने हंगामा किया।
सदन में बढ़ते हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने आश्वासन दिया कि संबंधित सवालों पर आगे स्पष्ट जवाब दिलवाया जाएगा, जिसके बाद स्थिति कुछ हद तक शांत हुई।
इमोशनल होने की जरूरत नहीं, विधायक फंड से एक करोड़ दो,स्टेडियम तैयार कर देंगे: राज्यवर्धन सिंह
प्रश्नकाल के दौरान खेल सुविधाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि कोटपूतली-बहरोड़ में खेल स्टेडियम के लिए जिला कलेक्टर को जमीन आवंटन के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि खेल ढांचे के विकास के लिए मापदंड तय हैं और विधायक कोटे से भी सहयोग लिया जा सकता है। इस पर भाजपा विधायक जसवंत यादव के सवाल पर मंत्री ने कहा कि इसमें भावुक होने की जरूरत नहीं है और विधायक कोटे से मात्र चार प्रतिशत राशि देने पर भी युवाओं के लिए स्टेडियम तैयार किया जा सकता है।
खेजड़ी बचाओ आंदोलन पर विधानसभा में गरमाई बहस, नेता प्रतिपक्ष ने कहा– सरकार धरने पर बैठे साधु-संतों से बातचीत करे: टीकाराम जूली
राजस्थान विधानसभा में शून्यकाल के दौरान खेजड़ी बचाओ आंदोलन का मुद्दा जोरशोर से उठा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि साधु-संत पिछले लंबे समय से धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार उनसे बातचीत तक नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि खेजड़ी केवल राज्य वृक्ष नहीं बल्कि देव वृक्ष है, जिसकी लोग पूजा करते हैं, इसके बावजूद सरकार आंखें मूंदे बैठी है। जूली ने आरोप लगाया कि सरकार उद्योगपतियों के आगे जरूरत से ज्यादा झुक रही है और पर्यावरण व आस्था दोनों की अनदेखी कर रही है।
आप उद्योगपतियों के आगे इतना झुकते क्यों हो ? चुनाव जीत लिया, मुद्दे को डाल दिया टोकरी में
कांग्रेस विधायक डूंगरराम गेदर ने कहा कि एक साल बाद संसदीय कार्य मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पेड़ काटने के जुर्माने को 100 रुपए से बढ़ाकर 1000 रुपए करने की बात कही, लेकिन दूसरी ओर वन विभाग की लकड़ी काटने पर छह महीने की सजा हटाकर मात्र 5000 रुपए का जुर्माना कर दिया गया। इससे उद्योगपतियों को खेजड़ी काटने की और ज्यादा छूट मिल गई है। उन्होंने बताया कि बीकानेर के नोखा दहिया क्षेत्र में रामगोपाल बिश्नोई के नेतृत्व में 567 दिनों से धरना चल रहा है और 19 दिसंबर 2025 को मुकाम में स्वामी रामानंदजी के नेतृत्व में महापंचायत हुई थी, जिसमें 2 फरवरी को महापड़ाव का ऐलान किया गया था।
डूंगरराम गेदर ने आरोप लगाया कि 10 नवंबर 2024 को जब बिश्नोई समाज ने राष्ट्रीय स्तर पर खेजड़ी बचाने के लिए महापड़ाव डाला, उस समय खींवसर उपचुनाव चल रहा था। सरकार को हार का डर लगा तो 9 नवंबर को कुचेरा में मुख्यमंत्री ने साधु-संतों से मुलाकात कर खेजड़ी पर सख्त कानून बनाने का आश्वासन दिया। चुनाव जीतने के बाद सरकार ने इस मुद्दे को “जुमलों की टोकरी” में डाल दिया और कोई ठोस कानून नहीं बनाया।
उन्होंने सदन को बताया कि आज भी 29 संत अन्न-जल त्याग कर आमरण अनशन पर बैठे हैं और 339 लोग बीकानेर में अनशन कर रहे हैं। तीन धरनार्थियों की तबीयत बिगड़ चुकी है, लेकिन सरकार का कोई प्रतिनिधि अब तक उनसे मिलने नहीं पहुंचा।
प्रश्नकाल के दौरान खेल सुविधाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि कोटपूतली-बहरोड़ में खेल स्टेडियम के लिए जिला कलेक्टर को जमीन आवंटन के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि खेल ढांचे के विकास के लिए मापदंड तय हैं और विधायक कोटे से भी सहयोग लिया जा सकता है। इस पर भाजपा विधायक जसवंत यादव के सवाल पर मंत्री ने कहा कि इसमें भावुक होने की जरूरत नहीं है और विधायक कोटे से मात्र चार प्रतिशत राशि देने पर भी युवाओं के लिए स्टेडियम तैयार किया जा सकता है।