



राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान बुधवार को राजस्थान विधानसभा में उस समय माहौल गरमा गया, जब भाजपा विधायक गोपाल शर्मा ने कांग्रेस की पिछली सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। गोपाल शर्मा ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में पेपरलीक और भ्रष्टाचार आम बात थी और उस समय के दो राज्य मंत्रियों को पेपरलीक मामलों में जेल जाना चाहिए था। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन डीजीपी ने फाइल देखते ही कहा था कि ये दोनों राज्य मंत्री जेल जाने योग्य हैं।
भाजपा विधायक ने आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि कांग्रेस के राज में एक पूर्व मंत्री तो दूसरे की पत्नी को अपनी पत्नी बताकर विदेश यात्रा तक पर ले गए थे। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जानकारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, विशेषकर शांति धारीवाल, को भी है और वे भली-भांति जानते हैं कि वह पूर्व मंत्री कौन था।
गोपाल शर्मा द्वारा कांग्रेस के कुछ पूर्व मंत्रियों के नाम लिए जाने पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कड़ा विरोध जताया। जूली ने कहा कि जो व्यक्ति सदन का सदस्य नहीं है, उस पर सदन के भीतर चर्चा नहीं की जा सकती। इस पर पीठासीन सभापति संदीप शर्मा ने हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट किया कि यदि किसी ऐसे व्यक्ति का नाम लिया गया है, जो सदन का सदस्य नहीं है, तो उसे विधानसभा की कार्यवाही से हटा दिया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिससे कुछ समय के लिए सदन का वातावरण तनावपूर्ण हो गया।
राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान शांति धारीवाल की टिप्पणी से सदन गरमाया, गाली कार्यवाही से निकाला, सदन से माफी मांगनी पड़ी
राज्यपाल के अभिभाषण पर बुधवार को हुई बहस के दौरान विधानसभा में उस समय माहौल गरमा गया, जब पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल की एक टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया। बहस के दौरान धारीवाल ने कहा कि यदि लाखों युवाओं को समय रहते स्किल ट्रेनिंग देकर रोजगार योग्य नहीं बनाया गया, तो यही युवा आबादी भविष्य में एक बड़ी चुनौती बन जाएगी।
धारीवाल की इस बात पर सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना तंज कसते हुए कहा कि इस देश में “एक युवक को छोड़कर सबको रोजगार मिल गया है।” इस पर प्रतिक्रिया देते हुए धारीवाल ने कहा कि गर्ग की बात उन्हें “आधी ही समझ आती है।” इसी दौरान उनके मुंह से एक आपत्तिजनक शब्द निकल गया, जिसे सदन में गाली के रूप में लिया गया।
धारीवाल के भाषण के समाप्त होते ही सरकारी मुख्य सचेतक ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि शांति धारीवाल ने अपनी आदत के मुताबिक एक बार फिर सदन में गाली दी है और इसे विधानसभा की कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए। इस पर सभापति ने हस्तक्षेप करते हुए उक्त शब्द को सदन की कार्यवाही से हटाने के आदेश दिए।
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है, जब शांति धारीवाल की भाषा को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले भी वे सदन में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग कर चुके हैं, जिस पर भारी हंगामा हुआ था और उन्हें सदन से माफी मांगनी पड़ी थी।