Monday, 02 March 2026

पंचायतीराज सशक्तिकरण सम्मेलन में कांग्रेस का सरकार पर बड़ा हमला, चुनाव नहीं हुए तो आमरण अनशन की चेतावनी


पंचायतीराज सशक्तिकरण सम्मेलन में कांग्रेस का सरकार पर बड़ा हमला, चुनाव नहीं हुए तो आमरण अनशन की चेतावनी

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जयपुर। बिड़ला सभागार में बुधवार को कांग्रेस की ओर से आयोजित पंचायतीराज सशक्तिकरण सम्मेलन में प्रदेश की राजनीति गरमा गई। सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार पर पंचायत चुनाव जानबूझकर टालने का गंभीर आरोप लगाया। डोटासरा ने साफ शब्दों में कहा कि यदि विधानसभा सत्र समाप्त होने तक पंचायत चुनावों की घोषणा नहीं की गई, तो वे और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली आमरण अनशन पर बैठेंगे।

डोटासरा ने कहा कि प्रदेश की अधिकांश पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, इसके बावजूद सरकार चुनाव कराने से बच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने मनमाने तरीके से वार्डों और पंचायतों का परिसीमन किया है। डोटासरा ने दावा किया कि पंचायत चुनाव हुए तो कांग्रेस भाजपा का सूपड़ा साफ कर देगी।

उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने 3000 करोड़ रुपए जारी करने से पहले स्पष्ट कर दिया था कि निकाय चुनाव कराना जरूरी है, फिर भी राज्य सरकार चुनाव टाल रही है। डोटासरा ने कहा कि मुख्यमंत्री दो साल में जितने नेताओं को जेल भेजना चाहते हैं भेज दें, लेकिन दो साल बाद जब कांग्रेस सत्ता में आएगी तो भाजपा को उसी भाषा में जवाब मिलेगा।

ओएमआर शीट गड़बड़ी प्रकरण पर बोलते हुए डोटासरा ने कहा कि भाजपा केवल कांग्रेस शासन के दौरान हुई भर्तियों की जांच की मांग कर रही है, जबकि पिछले 12 वर्षों की सभी भर्तियों की सीबीआई जांच करवा ली जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि कानून में स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद पंचायत चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं। उन्होंने मनरेगा कानून में किए गए बदलावों को लेकर सरकार को घेरा और कहा कि इससे गरीबों का काम का अधिकार छीना गया है। पहले मनरेगा में 90 प्रतिशत फंड केंद्र सरकार देती थी, जिसे अब 60:40 कर दिया गया है।

जूली ने आरोप लगाया कि प्रदेश में पिछले चार महीनों से वृद्धावस्था और विधवा पेंशन नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश पर बढ़ते कर्ज के कारण आम नागरिक प्रभावित हो रहा है और सरकार गरीब, किसान व मजदूर विरोधी नीतियां अपना रही है।

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