Tuesday, 17 March 2026

राशन की लाइन से मिलेगी मुक्ति, जयपुर-बीकानेर -भरतपुर में शुरू होगा अनाज एटीएम पायलट प्रोजेक्ट: सुमित गोदारा


राशन की लाइन से मिलेगी मुक्ति, जयपुर-बीकानेर -भरतपुर  में शुरू होगा अनाज एटीएम पायलट प्रोजेक्ट: सुमित गोदारा

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जयपुर। नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट (NFSA) से जुड़े परिवारों को जल्द ही राशन की दुकानों पर लगने वाली लंबी लाइनों से राहत मिलने वाली है। राज्य सरकार अब गेहूं वितरण के लिए अनाज एटीएम (ग्रेन एटीएम) की शुरुआत करने जा रही है। इसके तहत लाभार्थी परिवार का कोई भी सदस्य अपनी सुविधा के अनुसार, किसी भी समय एटीएम मशीन के माध्यम से अपने हिस्से का गेहूं निकाल सकेगा। सरकार आने वाले महीनों में इस व्यवस्था को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने जा रही है, जिसमें जयपुर, बीकानेर और भरतपुर जिलों को शामिल किया गया है।

बुधवार को शासन सचिवालय के कांफ्रेंस हॉल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए खाद आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि सरकार पारंपरिक राशन वितरण प्रणाली को आधुनिक और सुविधाजनक बनाने की दिशा में कदम उठा रही है। इसी क्रम में गेहूं वितरण के लिए ग्रेन एटीएम लगाए जाएंगे। इन मशीनों के जरिए NFSA से जुड़े लाभार्थी अपने निर्धारित कोटे का अनाज सीधे एटीएम से प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह बैंकिंग एटीएम 24×7 उपलब्ध रहते हैं, उसी तर्ज पर अनाज एटीएम भी चौबीसों घंटे काम करेंगे।

खाद आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने बताया कि इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि लोगों को राशन की दुकानों पर घंटों लाइन में खड़ा नहीं रहना पड़ेगा। समय और श्रम दोनों की बचत होगी, साथ ही वितरण प्रणाली में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। मशीन से मिलने वाले अनाज की मात्रा और वजन की पूरी जानकारी स्क्रीन पर दिखाई देगी, जिससे किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम होगी।

सूत्रों के अनुसार, देश में यह व्यवस्था नई नहीं है। ओडिशा राज्य में पहले से ही ग्रेन एटीएम सिस्टम लागू किया जा चुका है, जहां चावल का वितरण अनाज एटीएम के माध्यम से किया जा रहा है। यह मशीनें बायोमेट्रिक तकनीक से लैस होती हैं। लाभार्थी को केवल फिंगरप्रिंट सेंसर पर अंगूठा लगाना होता है, जिसके बाद मशीन स्वतः उसकी पहचान कर लेती है और पात्रता के अनुसार निर्धारित मात्रा में राशन उपलब्ध करा देती है।

राजस्थान में प्रस्तावित इस पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने पर भविष्य में इसे अन्य जिलों में भी विस्तार देने की संभावना है। इससे NFSA के तहत खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुगम, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाया जा सकेगा।

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