



मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान नहीं, बल्कि वह प्रकाश है जो अज्ञानता के अंधकार को दूर कर राष्ट्र के भविष्य को उज्ज्वल बनाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाई गई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21वीं सदी के भारत को नई दिशा देने वाली है। ‘विकसित भारत’ और ‘विकसित राजस्थान’ की नींव मजबूत करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी शिक्षकों के कंधों पर है।
मुख्यमंत्री शनिवार को बांसवाड़ा के लियो इंटरनेशनल संस्थान में राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) के प्रदेश स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने शिक्षा को शेरनी का दूध बताया था, जो समाज को सशक्त बनाता है। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो बौद्धिक विकास के साथ नैतिक और आत्मिक विकास भी करे।
नई शिक्षा नीति में शिक्षकों की भूमिका अहम
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा, रटने की बजाय तार्किक सोच, व्यावसायिक प्रशिक्षण और ड्रॉपआउट छात्रों की पुनः शिक्षा को बढ़ावा देती है। इस नीति को सफल बनाने में शिक्षकों की भूमिका निर्णायक है।
शिक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व पहल
उन्होंने बताया कि बीते दो वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में कई बड़े कदम उठाए गए हैं। 71 नए राजकीय महाविद्यालय स्थापित किए गए, 177 कॉलेज भवन बनाए गए और 17 कॉलेजों को यूजी से पीजी में क्रमोन्नत किया गया। 41 जिला मुख्यालयों पर कंप्यूटर साइंस विषय और बीबीए, जबकि 7 संभाग मुख्यालयों पर बीसीए कोर्स शुरू किए गए हैं।
डिजिटल और बुनियादी ढांचे को मजबूती
राज्य में 4 हजार से अधिक विद्यालयों में 8 हजार से ज्यादा स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए गए हैं। 500 पीएम श्री विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी और 142 स्कूलों में ओ-लैब शुरू की गई हैं। 65 हजार स्कूल भवनों की मरम्मत जारी है।
छात्रों को सीधा लाभ
कक्षा 1 से 8 तक सभी छात्रों और कक्षा 9 से 12 की छात्राओं को यूनिफॉर्म व स्कूल बैग के लिए 800 रुपये डीबीटी से दिए जा रहे हैं। अब तक 41 लाख से अधिक विद्यार्थियों को 330 करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता दी जा चुकी है। कालीबाई भील और देवनारायण स्कूटी योजना के तहत 39 हजार से अधिक स्कूटियां वितरित की गई हैं।
युवाओं को रोजगार और सुरक्षित भविष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि संकल्प पत्र के 70 प्रतिशत वादे पूरे या प्रगतिरत हैं। अब तक 92 हजार युवाओं को नियुक्तियां दी गई हैं और 1.53 लाख पदों पर भर्ती प्रक्रियाधीन है। दो वर्षों में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ, जो सरकार की पारदर्शिता का प्रमाण है।
सम्मेलन बना चिंतन का मंच
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से अपील की कि वे ऐसा वातावरण बनाएं, जहां विद्यार्थी केवल परीक्षा पास करने वाले नहीं, बल्कि स्वाभिमानी और राष्ट्रभक्त नागरिक बनें। सम्मेलन को उन्होंने शिक्षा सुधार के लिए एक सशक्त चिंतन मंच बताया।
इस अवसर पर जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी, विधायकगण, अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ और राजस्थान शिक्षक संघ के पदाधिकारी, अधिकारीगण तथा बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।
#Live :- राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) का प्रदेश स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन, बांसवाड़ाhttps://t.co/iFVjlEtyoi
— Bhajanlal Sharma (@BhajanlalBjp) December 20, 2025