



झालावाड़ जिले में नशा तस्करी के नेटवर्क पर बड़ी और निर्णायक कार्रवाई करते हुए पुलिस ने ‘ऑपरेशन दिव्य प्रहार’ के तहत करीब 125 करोड़ रुपए की अवैध संपत्तियों को स्थायी रूप से फ्रीज कर दिया है। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई ने प्रदेश में नशा माफियाओं पर कड़ा संदेश दिया है कि अब ड्रग तस्करी का परिणाम केवल जेल नहीं, बल्कि उनकी काली कमाई की पूरी जब्ती भी होगा।
पुलिस द्वारा फ्रीज की गई संपत्तियों में आलीशान मकान, पेट्रोल पंप, लग्जरी गाड़ियां, कृषि भूमि, कॉमर्शियल प्लॉट और अन्य महंगी परिसंपत्तियां शामिल हैं। संपत्तियां फ्रीज होने के बाद अब तस्कर न इन्हें बेच सकेंगे, न गिरवी रख सकेंगे और न किसी भी प्रकार से उपयोग कर पाएंगे। करीब तीन महीनों तक चली विशेष जांच के दौरान पुलिस ने नशा तस्करी से जुड़े अपराधियों और उनके रिश्तेदारों की अवैध कमाई का विस्तृत डाटाबेस तैयार किया। इसके आधार पर थाना प्रभारियों, साइबर यूनिट और विशेष जांच दल ने कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए इन संपत्तियों को फ्रीज किया।
पुलिस ने यह कार्रवाई NDPS एक्ट की धारा 68-एफ के तहत की, जिसके लिए दिल्ली स्थित सक्षम प्राधिकारी से औपचारिक मंजूरी भी प्राप्त की गई। अभियान के तहत 71 नशा तस्करों की 107 संपत्तियों को फ्रीज किया गया है, जिनमें कई लग्जरी गाड़ियां, पेट्रोल पंप और महंगे घर शामिल हैं। इस बड़े अभियान से पुलिस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ड्रग माफिया अब केवल गिरफ्तारी से नहीं डरेंगे—उनकी अवैध संपत्तियां भी पूरी तरह जब्त की जाएंगी। यह कार्रवाई जिले में नशा तस्करी को खत्म करने की दिशा में माइलस्टोन मानी जा रही है।