अजमेर दरगाह परिसर में शिव मंदिर होने के दावे को लेकर चल रहे विवाद में शनिवार को सिविल कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) और अल्पसंख्यक विभाग की ओर से दाखिल किए गए दो प्रार्थना पत्रों पर बहस हुई। अदालत में दोनों विभागों के वकीलों ने दलील दी कि याचिकाकर्ता विष्णु गुप्ता ने नोटिस देने और सरकार को पक्षकार बनाने जैसी आवश्यक विधिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया है।
गुप्ता की ओर से पेश वकील संदीप ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह मामला ज्यूरीडिक्शन से संबंधित है और इसके लिए अलग से प्रार्थना पत्र जरूरी नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि दरगाह परिसर में संकट मोचन शिव मंदिर की पूजा-अर्चना के अधिकार को लेकर याचिका विधि सम्मत है और इसे खारिज करने का आधार नहीं बनता।
सुनवाई के दौरान दरगाह कमेटी द्वारा दाखिल प्रार्थना पत्र पर बहस नहीं हो सकी। अदालत ने इस पर अब 6 सितंबर की तारीख तय की है। उस दिन दरगाह कमेटी की याचिका पर तर्क सुने जाएंगे कि याचिकाकर्ता की ओर से दायर वाद को क्यों खारिज किया जाना चाहिए।
सुनवाई को लेकर कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही। सिविल लाइन थाना पुलिस के साथ ही अतिरिक्त पुलिस जाब्ता तैनात किया गया, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो और कार्यवाही शांतिपूर्वक संपन्न हो सके।