अजमेर की ऐतिहासिक ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह परिसर में स्थित कथित संकट मोचन शिव मंदिर को लेकर उठे विवाद पर शनिवार को अदालत में सुनवाई होगी। यह मामला लंबे समय से सुर्खियों में है और आज की कार्यवाही में दरगाह कमेटी और अल्पसंख्यक विभाग द्वारा पूर्व में दाखिल प्रार्थना-पत्र (7/11 आवेदन) पर बहस होगी।
सुनवाई की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट परिसर में सुरक्षा के विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। सिविल लाइन थाना पुलिस के साथ अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दिल्ली निवासी विष्णु गुप्ता याचिकाकर्ता हैं। वे अपने वकील के साथ कोर्ट पहुंचे और मीडिया से बातचीत में कहा कि दरगाह कमेटी का प्रार्थना-पत्र निराधार है और उम्मीद है कि अदालत इसे खारिज करेगी।
दरअसल, इससे पहले 19 जुलाई को इस मामले की सुनवाई निर्धारित थी, लेकिन न्यायिक अधिकारी और कर्मचारियों की सामूहिक छुट्टी के चलते सुनवाई टल गई थी और नई तारीख 30 अगस्त तय की गई थी।
मामले की पृष्ठभूमि में, विष्णु गुप्ता ने वाद दायर कर दरगाह परिसर में संकट मोचन शिव मंदिर की पूजा-अर्चना में किसी प्रकार की बाधा न डालने का अनुरोध किया है। इस पर दरगाह कमेटी और केंद्रीय पुरातत्व मंत्रालय की ओर से आपत्तियाँ दर्ज कराई गईं और कोर्ट में तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता ने मुकदमा दायर करने से पूर्व आवश्यक विधिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया है। आज की सुनवाई से यह तय होगा कि अदालत इस विवाद को आगे किस दिशा में ले जाएगी और दरगाह परिसर में स्थित मंदिर के दावे पर क्या निर्णय सामने आता है।