अजमेर। अजमेर के इतिहास में पहली बार श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। यह आयोजन गुरुवार को प्रेम प्रकाश आश्रम, चौरसियावास रोड, वैशाली नगर में शुरू हुआ, जहां कथा का वाचन महानिर्वाणी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद भारती जी महाराज के श्रीमुख से किया जा रहा है। इस अवसर पर मथुरा कृष्णि पीठाधीश्वर स्वामी शरणानंद जी महाराज का विशेष सानिध्य भी प्राप्त हुआ।
कथा के प्रथम दिवस पर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद भारती ने देवी भागवत महापुराण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा किजैसे श्रीमद्भागवत पुराण का स्थान वैष्णव परंपरा में सर्वोच्च है, वैसे ही श्रीमद् देवी भागवत महापुराण शाक्त परंपरा में अद्वितीय है।"
उन्होंने बताया कि इस महापुराण में 12 स्कंध, लगभग 318 अध्याय और 18,000 श्लोक हैं, जो शाक्त परंपरा के सिद्धांतों और देवी भक्ति के महत्व को दर्शाते हैं।
प्रेम प्रकाश आश्रम के महंत साईं राजू राम जी सहित संत–महंतों ने आचार्य महामंडलेश्वर और स्वामी शरणानंद जी महाराज की भव्य अगवानी की।
इस अवसर पर सनातन धर्म रक्षा संघ अजयमेरू राजस्थान के अध्यक्ष और पूर्व न्यायाधीश अजय शर्मा, देवेंद्र त्रिपाठी, विजय कुमार शर्मा, डॉ. कुलदीप शर्मा, डॉ. रामनिवास शर्मा, ब्रजेश गौड़, डॉ. लाल थदानी, डॉ. ओ.पी. टांक, राजकुमार चौरसिया सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने पुष्पमालाओं और अंगवस्त्र द्वारा संतजनों का स्वागत किया।
कथा आरंभ होने से पूर्व भोलेश्वर महादेव मंदिर (जनता कॉलोनी, वैशाली नगर) से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा प्रेम प्रकाश आश्रम तक पहुंची, जहां जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इस शोभायात्रा ने पूरे आयोजन को धार्मिक और सांस्कृतिक आभा प्रदान की।