वक्फ संशोधन बिल गुरुवार देर रात राज्यसभा में भी बहुमत से पारित हो गया। बिल के पक्ष में 128 सांसदों ने मतदान किया, जबकि 95 सांसदों ने विरोध में वोट दिया। इससे पहले बुधवार को यह बिल लोकसभा से भी पारित हो चुका है। अब संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद यह बिल राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
राज्यसभा में वक्फ संशोधन बिल पर तीखी बहस देखने को मिली। नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बिल ऐसा माहौल बना रहा है जैसे इसे अल्पसंख्यकों को तंग करने के लिए लाया गया हो। उन्होंने कहा कि अगर इसमें केवल 1995 के वक्फ एक्ट के तकनीकी सुधार किए गए होते, तो कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन इसमें ऐसे प्रावधान जोड़े गए हैं जो अस्वीकार्य हैं।
वहीं, बीजू जनता दल (BJD) ने कहा कि उसने अपने सांसदों को कोई व्हिप जारी नहीं किया, और सांसदों से अंतरात्मा की आवाज के आधार पर वोट डालने की बात कही।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने UPA सरकार की तुलना में वक्फ मामलों को ज्यादा गंभीरता से लिया है। उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए अल्पसंख्यकों में डर फैलाने का आरोप लगाया।
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने बहस के दौरान ताजमहल पर वक्फ बोर्ड के दावे का उल्लेख करते हुए कहा कि जब इस तरह के अतिरेक दावे सामने आते हैं, तो कानून में सुधार जरूरी हो जाता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसे दावों को खारिज करते हुए फटकार लगाई थी।
वक्फ संशोधन बिल को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। जहां सरकार इसे सुधारात्मक और पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों पर प्रहार बता रहा है।