Monday, 31 March 2025

जल आत्मनिर्भरता पर राष्ट्रीय सम्मेलन, मुख्यमंत्री शर्मा बोले- 2047 तक भारत को जल सुरक्षित राष्ट्र बनाना हमारा विजन


जल आत्मनिर्भरता पर राष्ट्रीय सम्मेलन, मुख्यमंत्री शर्मा बोले- 2047 तक भारत को जल सुरक्षित राष्ट्र बनाना हमारा विजन

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जल आत्मनिर्भरता भारत के सुरक्षित और समृद्ध भविष्य के लिए आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जल संरक्षण के लिए सुव्यवस्थित रोडमैप की जरूरत है, जिसमें कृषि, शहरी जल प्रबंधन और तकनीकी नवाचार जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाए।

मुख्यमंत्री शर्मा उदयपुर में आयोजित राज्य जल मंत्रियों के दूसरे अखिल भारतीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जल संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की और कहा कि जल राज्यों का विषय होने के बावजूद, प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता बना दिया है।

जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता

प्रधानमंत्री मोदी ने "हर घर नल से जल" योजना को सफलतापूर्वक लागू किया, जिससे राजस्थान समेत पूरे देश में करोड़ों लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है।जल जीवन मिशन के माध्यम से राजस्थान सरकार शेष परिवारों तक नल कनेक्शन पहुंचाने में तेजी से काम कर रही है।प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण को देश के विकास एजेंडे में प्राथमिकता दी है और इसी उद्देश्य से "जल शक्ति मंत्रालय" की स्थापना की गई।

राजस्थान के लिए जल प्रबंधन योजनाएं

"राम जल सेतु लिंक परियोजना" को राजस्थान की जीवन रेखा बताया गया, जिससे 17 जिलों में 4 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और 3 करोड़ से अधिक लोगों को पेयजल मिलेगा।"कर्मभूमि से मातृभूमि" अभियान के तहत प्रवासी राजस्थानी, प्रदेश के 60,000 गांवों में भूजल पुनर्भरण के लिए "रिचार्ज वैल" बनाने में योगदान दे रहे हैं।राज्य सरकार जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कम पानी में उगने वाली फसलों, शहरी जल प्रबंधन और सीवरेज के पानी के पुनः उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है।

केंद्र सरकार की जल प्रबंधन योजनाएं

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि 2047 तक भारत को जल सुरक्षित राष्ट्र बनाने के लिए व्यापक योजनाएं बनाई जा रही हैं।जल जीवन मिशन के तहत 15 करोड़ घरों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया गया है।
60 करोड़ लोगों को स्वच्छता मिशन से जोड़ा गया, जिससे डायरिया जैसी बीमारियों में कमी आई। "कैच द रेन" अभियान चलाकर वर्षा जल संरक्षण को प्रोत्साहित किया जा रहा है।"संशोधित पीकेसी लिंक परियोजना" के तहत राजस्थान को अतिरिक्त जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
यमुना जल समझौते के तहत हरियाणा और राजस्थान के बीच सरप्लस पानी की आपूर्ति पर भी चर्चा हुई।

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने कहा कि राज्य में महानदी, गोदावरी, नर्मदा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियां बहती हैं, लेकिन वर्षा वितरण में असमानता की वजह से जल प्रबंधन को प्राथमिकता दी जा रही है।
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने बताया कि राज्य का 70% हिस्सा वन क्षेत्र में आता है और कृषि आधारित आजीविका जल संरक्षण के बेहतर प्रबंधन की मांग करती है।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी जल संरक्षण के महत्व पर अपने विचार रखे।

महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर पुष्पांजलि

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने महाराणा प्रताप गौरव केंद्र पर महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।कर्मभूमि से मातृभूमि" अभियान के तहत जल संचय-जन भागीदारी योजना के अंतर्गत बोरवेल कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

मुख्य घोषणाएं और लॉन्चिंग

"नारी शक्ति से जल शक्ति" अभियान की शुरुआत।
"मोनोग्राफ वाटर हेरिटेज साइट ऑफ इंडिया" और "जल जीवन मिशन-ब्रेकिंग द सोशल बैरियर" का ई-लॉन्च।
"जल संचय-जन भागीदारी" फिल्म और गीत का ई-लॉन्च किया गया।इस राष्ट्रीय जल सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों, जल संसाधन विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों ने भाग लिया, जिससे जल आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम उठाने का संकल्प लिया गया। 

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