Sunday, 30 November 2025

जालोर के हैड कांस्टेबल पूनमाराम को 7 दिन का सैल्यूट और परेड अभ्यास, एसपी ज्ञानचंद्र यादव ने दिए विशेष निर्देश


जालोर के हैड कांस्टेबल पूनमाराम को 7 दिन का सैल्यूट और परेड अभ्यास, एसपी ज्ञानचंद्र यादव ने दिए विशेष निर्देश

जालोर पुलिस लाइन में तैनात हैड कांस्टेबल पूनमाराम को कोर्ट में गवाही के दौरान उनके अव्यवहारिक आचरण के कारण 7 दिन तक सैल्यूट और परेड का विशेष अभ्यास करवाने के निर्देश जारी किए गए हैं। यह निर्देश जालोर के एसपी ज्ञानचंद्र यादव ने 30 नवंबर 2024 को पुलिस लाइन के संचित निरीक्षक को दिए।

मामले की पृष्ठभूमि:अव्यवहारिक आचरण: कोर्ट में गवाही के लिए पहुंचने और गवाही देते समय हैड कांस्टेबल पूनमाराम का आचरण अव्यवहारिक पाया गया।

उल्लेखित पत्र :निर्देशों में पाली रेंज पुलिस महानिरीक्षक के पत्रांक 502 और न्यायालय के अर्द्धशासकीय पत्र का हवाला दिया गया है।

प्रशिक्षण का उद्देश्य: एसपी का मानना है कि सैल्यूट और परेड का अभ्यास हैड कांस्टेबल को अनुशासन और व्यवहार सुधारने में मदद करेगा।

निर्देशों की जानकारी:अभ्यास की अवधि: 7 दिनों तक पुलिस लाइन में सैल्यूट और परेड का नियमित प्रशिक्षण

कार्यक्रम की देखरेख: संचित निरीक्षक, पुलिस लाइन, जालोर को इस अभ्यास का निरीक्षण और संचालन करने की जिम्मेदारी दी गई है।

प्रशिक्षण का महत्व:यह कदम पुलिसकर्मियों में अनुशासन और पेशेवर व्यवहार को सुधारने के उद्देश्य से उठाया गया है।

एसपी ज्ञानचंद्र यादव का बयान: "पुलिसकर्मियों का आचरण न्यायालय और अन्य सरकारी संस्थानों में अनुशासन का प्रतीक होना चाहिए। यह प्रशिक्षण एक सुधारात्मक कदम है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न हों।"

पुलिस लाइन में प्रशिक्षण की प्रक्रिया: सैल्यूट अभ्यास:गार्ड ऑफ ऑनर और अन्य औपचारिक सैल्यूट तकनीकों का अभ्यास।

परेड प्रशिक्षण:पुलिस अनुशासन को मजबूत करने के लिए नियमित परेड।

अभ्यास का मूल्यांकन:7 दिनों के बाद पुलिस लाइन निरीक्षक द्वारा एसपी को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।

न्यायालय का निर्देश: न्यायालय के अर्द्धशासकीय पत्र में पुलिसकर्मियों को न्यायालय की गरिमा बनाए रखने और अनुशासनपूर्वक कार्य करने की सलाह दी गई थी।

हैड कांस्टेबल पूनमाराम के प्रशिक्षण का यह निर्देश जालोर पुलिस के अनुशासन और पेशेवर रवैये को सुधारने का एक सकारात्मक प्रयास है। यह कदम न केवल पुलिस विभाग में अनुशासन को बढ़ावा देगा, बल्कि न्यायालय और अन्य संस्थानों में पुलिस की छवि को भी मजबूत करेगा।

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