


सिविल लाइंस में कांग्रेस विधायक और खाद्य आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास और भाजपा के नए चेहरे गोपाल शर्मा के बीच सीधा मुकाबला हुआ है। सिविल लाइन विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के प्रत्याशी और खाद्य आपूर्ति मंत्री पर खाचरियावास की प्रतिष्ठा दांव पर हैं । वहीं भाजपा को नए चेहरे से उम्मीद है कि वे सिविल लाइंस सीट पर रिवाज को बरकरार रखेंगे। गोपाल शर्मा सांगानेर से टिकट मांग रहे थे लेकिन, पार्टी ने वहां से टिकट न देकर सिविल लाइंस से मौका दिया। यहां के पूर्व विधायक डॉ.अरुण चतुर्वेदी का टिकट काट दिया था। दूसरे दावेदार रणजीत सोडाला ने टिकट नहीं मिलने पर बगावत कर दी और नामांकन भरा था, भाजपा ने उन्हें मना लिया और संगठन में प्रदेश मंत्री का पद भी दे दिया।
कांग्रेस प्रत्याशी खाचरियावास ने विकास के काम जनता के बीच जाकर गिनाए और गहलोत सरकार की गारंटी के नाम पर वोट मांगें। भाजपा प्रत्याशी शर्मा ने कांग्रेस प्रत्याशी पर अहंकार बनाम विनम्रता और तुष्टीकरण के आरोप लगाए और चुनाव को धर्म के नाम पर मोड़ दिया। मतदान के दिन इसका असर भी दिखा।
शर्मा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा का रोड शो कराया वहीं, खाचरियावास ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की जनसभा से वोट प्रभावित करने की रणनीति को अमलीजामा पहनाया। खाचरियावास ने लोगों से अपील की थी कि वे पांच साल आपके बीच रहे और मेरे काम के नाम पर वोट दें, किसी के बहकावे में नहीं आए। भाजपा प्रत्याशी गोपाल शर्मा ने कांग्रेस प्रत्याशी खाचरियावास पर कई आरोप भी लगाए। हालांकि इस सीट पर द्रव्यवती नदी का मुद्दा है, जिस पर काम तो हुआ लेकिन अधूरे रख रखाव के चलते लोग परेशान हैं।