


मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शनिवार को विधानसभा चुनाव में राजनीति का खेल खेलने से पीछे नहीं रहे। उन्होंने सवाई मानसिंह अस्पताल में 2 साल से इलाज कर रहे बिजली विभाग के AEN हर्षाधिपति से मिलवाने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपने साथ ले गए। उन्होंने इस दौरान दलित राजनीति को प्रदर्शित करने का काम किया। इस मुलाकात के दौरान एइएन के पिताऔर कांग्रेस से चाकसू से विधायक का चुनाव लड़ चुके मुकेश वाल्मीकि भी साथ थे।
जब घटना घटी थी तो मुकेश वाल्मीकि ने भी कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था और ऐसे विधायक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।लेकिन उसे समय उनकी मांग को दबा दिया गया। विधानसभा के चुनाव में नेताओं के दौरे चल रहे है। शनिवार को मल्लिकार्जुन खड़गे भी भरतपुर जिले के बेर विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर रहे। भरतपुर जिले के बेर विधानसभा क्षेत्र के दौरे से पहले उन्होंने AEN हर्षाधिपति से मुलाकात की। यही नहीं सीएम गहलोत ने योजनाबद्ध तरीके से भाजपा को दलित विरोधी पार्टी बताने के लिए अपना राजनीतिक जादू भी दिखाया।
सीएम गहलोत ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मीडिया से रूबरू कराकर यह कहलवाया गया कि हमने तो दलित अधिकारी पर हमला करने वाले विधायक गिरिराज सिंह मलिंगा का टिकट काट दिया था। लेकिन भाजपा ने उसे टिकट देकर दलित विरोधी काम किया है।
अब लोग सीएम गहलोत से पूछ रहे हैं कि इस घटना के लगभग 2 साल तक विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को कांग्रेस में किसने रखा और उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई ? उस समय सीएम गहलोत का विश्वास प्राप्त विधायक गिर्राज मलिंगा के खिलाफ मुकदमा जरूर दर्ज किया और लंबे अरसे के बाद दिखाने के लिए उसकी नाटकीय ढंग से गिरफ्तारी भी की गई। पर न्यायालय से उन्हें जमानत दे दी। लेकिन जब यह पूछा जाए की कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने ऐसे विधायक को निलंबित क्यों नहीं किया। यहां यह बात भी सही है कि कांग्रेस से निष्कासित हुए मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ही समझाकर सीएम गहलोत से मिलवाने गिरिराज सिंह मलिंगा को लेकर गए थे। उसके बाद ही उन्हें जयपुर पुलिस कमिश्नर के सम्मुख पेश होकर गिरफ्तारी की रस्म अदाएगी कराई की गई थी। अब दोनों ही कांग्रेस के विधायक नहीं है। लेकिन गिरिराज मलिंगा भाजपा से और राजेंद्र गुढ़ा शिवसेना से चुनाव लड़ रहा है।
पूर्वी राजस्थान की राजनीति में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी चुनावी दौरे पर रहे। पीएम मोदी ने अपने चुनावी दौरे में इस मुद्दे को नहीं उठाया। वहीं दूसरी और सीएम गहलोत ने एसएमएस अस्पताल से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्पष्ट तौर पर इस घटना का जिक्र कियाऔर कहा कि हमने तो उसे विधायक का टिकट कटा था लेकिन भाजपा ने उसे टिकट दे दिया है और वह चुनाव लड़ रहा है।
यही नहीं मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कहा कि भाजपा दलित विरोधी है और घिनौना कार्य करने वाले को भी टिकट देती है। लेकिन अब यह पूछा जाए कि आखिरआपकी पार्टी ने भी समय रहते हुए कार्रवाई क्यों नहीं कि इसका जवाब किसी के पास नहीं है । किसी ने सही कहा है की राजनीति में जो होता है वह दिखता नहीं और जो दिखता है वह होता नहीं। इस घटना का भी अगर समीक्षा की जाए तो यह सब कुछ नजर सामने आता है चलो विधानसभा का चुनाव है राजनीति करने का दोनों ही पार्टियों को अधिकार है अब इसमें सफलता किसको मिलेगी यह तो 3 दिसंबर के चुनाव परिणाम ही बता पाएगा।