Saturday, 29 August 2026

हमारी संस्कृति यज्ञमय हैं, यज्ञ में सपर्मण का भाव होता है- डॉ. भागवत

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि हमारी संस्कृति यज्ञमय है, जिसमें समर्पण का भाव होता है। पेड़ लगाना, समाज के गरीब और पिछड़े बंधुओं की सहायता करना भी एक यज्ञ है। कोटपूतली में बालनाथ आश्रम में आयोजित श्री महामृत्युंजय महायज्ञ में भागवत ने कहा कि भारत को कोई संकट नहीं मिटा सकता, क्योंकि भारत और सनातन धर्म एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।