



नई दिल्ली। वेदांता ग्रुप के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने नेशनल न्यूट्रिशन वीक के मौके पर अपने जीवन के संघर्षपूर्ण दिनों को याद करते हुए कहा कि उनके लिए भोजन केवल भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि कई गहरी यादों और जीवन के सबक से जुड़ा हुआ है। उन्होंने न्यूयॉर्क में बिताए उन दिनों का जिक्र किया, जब वे सीमित संसाधनों के बीच एक मेटल वायर कंपनी खरीदने की कोशिश कर रहे थे और एक-एक डॉलर उनके लिए महत्वपूर्ण था।
अग्रवाल ने बताया कि उन दिनों कई बार उनका पूरा दिन बिल्डिंग के बाहर लगे ठेले के एक सैंडविच या घर से बने पराठों पर गुजर जाता था। कई रातें ऐसी भी थीं जब उन्हें आधा पेट सोना पड़ता था।
अनिल अग्रवाल ने कहा कि वे खाने के बेहद शौकीन हैं और शायद यही वजह है कि भूख वाले वे दिन आज भी उन्हें उतनी ही गहराई से याद हैं।
उन्होंने कहा कि उसी दौर ने उन्हें यह समझाया कि जीवन में सचमुच कीमती चीजें केवल पैसा या संपत्ति नहीं होतीं, बल्कि वे रिश्ते और छोटे-छोटे मानवीय भाव होते हैं जो मुश्किल वक्त में साथ देते हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक दोस्त जो अपनी थाली आपके साथ बांट ले, कोई पड़ोसी जो परदेस में आपके घर देसी खाना पहुंचा दे या कोई वालंटियर जो जरूरत के समय गरम खाना परोस दे—ये अनुभव जीवनभर याद रहते हैं।
अग्रवाल ने बताया कि जब वे न्यूयॉर्क में अकेले रहकर एक मेटल वायर कंपनी खरीदने की कोशिश कर रहे थे, तब आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि हर डॉलर सोच-समझकर खर्च करना पड़ता था।
उन्होंने याद किया कि कई दिन बेहद सादगी में गुजरे और कई बार भरपेट भोजन भी उपलब्ध नहीं हो पाता था। यही अनुभव आगे चलकर उनके लिए भोजन और पोषण से जुड़े सामाजिक कामों को भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण बनाते गए।
अनिल अग्रवाल ने कहा कि नंदघर और अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के माध्यम से किया जा रहा पोषण और सामुदायिक विकास का काम उनके दिल के बहुत करीब है। उन्होंने कहा कि इन पहलों के पीछे कोशिश यही है कि कोई बच्चा, कोई परिवार और कोई गांव भूखे पेट सोने को मजबूर न हो। अग्रवाल ने भूख और कुपोषण की समस्या को केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि मानवीय अनुभव से जोड़कर देखने की जरूरत बताई।
नेशनल न्यूट्रिशन वीक पर लोगों से अपील करते हुए अनिल अग्रवाल ने कहा कि जिन लोगों ने अपने जीवन में कभी भूख या अभाव को करीब से महसूस किया है, वे उस अनुभव को अपनी ताकत में बदलें।
उन्होंने लोगों से कहा कि जब भी मौका मिले, किसी जरूरतमंद की भूख मिटाने, भोजन बांटने या पोषण से जुड़ी पहल का हिस्सा बनने की कोशिश करें। उनका संदेश था कि भोजन बांटना केवल मदद नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति को सम्मान, सुरक्षा और उम्मीद देने जैसा है।