



जयपुर। राजस्थान में शहरी निकाय चुनाव के टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस के भीतर मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। जयपुर स्थित कांग्रेस वॉर रूम में भीलवाड़ा जिले के नगरीय निकायों के प्रत्याशियों को लेकर हुई बैठक के दौरान पूर्व मंत्री रामलाल जाट और पूर्व विधायक धीरज गुर्जर के बीच तीखी बहस हो गई।
बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच टिकटों को लेकर शुरू हुआ विवाद धीरे-धीरे व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया। बैठक में मौजूद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शांत कराया।
भीलवाड़ा के शहरी निकायों के वार्डवार टिकटों पर चर्चा के लिए कांग्रेस वॉर रूम में बैठक बुलाई गई थी। इसमें स्थानीय नेताओं से मिले फीडबैक और संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार किया जाना था।
लेकिन बैठक शुरू होने के साथ ही रामलाल जाट और धीरज गुर्जर के बीच मतभेद सामने आ गए। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के साथ बैठकर प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा करने को लेकर भी आपत्ति जताई। इसके बाद माहौल लगातार तनावपूर्ण होता गया।
सूत्रों के मुताबिक वार्डों में प्रत्याशी चयन और स्थानीय राजनीतिक प्रभाव को लेकर दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के सुझावों पर सवाल उठाए।
बहस बढ़ने के दौरान रामलाल जाट ने धीरज गुर्जर को लेकर तीखी टिप्पणी की और उन पर गंभीर आरोप लगाए। इसके जवाब में धीरज गुर्जर ने भी रामलाल जाट के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए पलटवार किया।
बैठक के दौरान दोनों तरफ से इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर भी पार्टी नेताओं में असहजता की स्थिति बनी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और वे बैठक के दौरान हुए आपसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा बताए जा रहे हैं।
मामला बढ़ता देख प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने दोनों नेताओं को समझाया।
दोनों वरिष्ठ नेताओं ने टिकट चयन की प्रक्रिया को संगठनात्मक स्तर पर आगे बढ़ाने और व्यक्तिगत विवाद को बैठक से अलग रखने की कोशिश की। काफी देर की समझाइश के बाद स्थिति नियंत्रण में आई और प्रत्याशियों को लेकर चर्चा आगे बढ़ाई गई।
भीलवाड़ा जिले के कई नगरीय निकायों में कांग्रेस से टिकट मांगने वालों की संख्या अधिक है। अलग-अलग स्थानीय गुट अपने समर्थकों को प्रत्याशी बनाने की पैरवी कर रहे हैं।
इसी वजह से कई वार्डों में एक नाम पर सहमति बनाना पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बन गया है। स्थानीय स्तर पर मजबूत नेताओं के बीच मतभेद टिकट वितरण के बाद बगावत की आशंका भी बढ़ा सकते हैं।
निकाय चुनाव में वार्ड स्तर पर प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ काफी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में किसी मजबूत दावेदार का टिकट कटने पर उसके निर्दलीय चुनाव लड़ने या अधिकृत प्रत्याशी का विरोध करने की संभावना रहती है।
कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश है कि अधिकांश वार्डों में सहमति के आधार पर उम्मीदवार तय किए जाएं, लेकिन भीलवाड़ा की बैठक में सामने आया विवाद दिखाता है कि कुछ जिलों में यह प्रक्रिया आसान नहीं रहने वाली।
बैठक के बाद अब नजर इस बात पर है कि भीलवाड़ा के विवादित वार्डों में पार्टी किसके नाम पर मुहर लगाती है। कांग्रेस नेतृत्व को टिकट वितरण के साथ स्थानीय नेताओं के बीच संतुलन बनाने की भी चुनौती होगी।
निकाय चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया आगे बढ़ने के कारण पार्टी के पास फैसले के लिए ज्यादा समय नहीं है। ऐसे में आने वाले समय में भीलवाड़ा के प्रत्याशियों की सूची और दोनों नेताओं के समर्थकों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।