



अजमेर। नगर निगम में कथित रूप से नियमों के विरुद्ध पट्टे जारी करने और जमीन से जुड़े मामले को लेकर भाजपा के भीतर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भाजपा से दो बार महापौर रह चुके धर्मेंद्र गहलोत ने दावा किया है कि उनके पास एक पेन ड्राइव में ऑडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है, जिसमें कथित फर्जी पट्टे का मुद्दा विधानसभा में उठाने और जमीन से जुड़ी बातचीत का जिक्र है।
गहलोत का दावा है कि ऑडियो में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रियशील हाड़ा की आवाज भी सुनाई देती है। हालांकि हाड़ा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए रिकॉर्डिंग को फर्जी बताया है और इस मामले में कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
धर्मेंद्र गहलोत ने कहा कि उनके पास मौजूद पेन ड्राइव में ऐसी बातचीत रिकॉर्ड है, जिसमें जमीन और पट्टों से जुड़े विवाद का उल्लेख किया गया है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि बातचीत में कथित फर्जी पट्टे का मुद्दा विधानसभा में उठाने से संबंधित चर्चा है। गहलोत के मुताबिक रिकॉर्डिंग में प्रियशील हाड़ा की आवाज है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और ऑडियो की प्रामाणिकता को लेकर भी कोई आधिकारिक फॉरेंसिक रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
धर्मेंद्र गहलोत के आरोपों के बाद प्रियशील हाड़ा ने भी पलटवार किया है। उन्होंने कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग को फर्जी बताते हुए कहा कि इस तरह के आरोपों को लेकर वे कानूनी कार्रवाई करेंगे। हाड़ा के रुख के बाद मामला अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे कानूनी विवाद का रूप भी ले सकता है।
अजमेर नगर निगम में नियमों के विरुद्ध पट्टे जारी किए जाने का मामला इससे पहले विधानसभा तक पहुंच चुका है। शिव निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सदन में इस विषय को ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए उठाया था। इसमें अजमेर नगर निगम में कथित रूप से गलत तरीके से पट्टे जारी किए जाने का मुद्दा सामने रखा गया था।
विधानसभा में मामला उठने के बाद जवाब देते हुए यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कार्रवाई की जानकारी दी थी।
कथित फर्जी पट्टा जारी करने से जुड़े मामले में उपायुक्त विकास, वरिष्ठ प्रारूपकार, कनिष्ठ अभियंता सिविल और कनिष्ठ सहायक को एपीओ किया गया था। इस कार्रवाई के बाद अजमेर नगर निगम में पट्टा जारी करने की प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल और गहरे हो गए थे।
सरकार ने केवल एक मामले तक जांच सीमित नहीं रखी, बल्कि पिछले छह महीनों में जारी किए गए पट्टों की भी समीक्षा कराने का फैसला किया। अजमेर कलेक्टर लोकबंधु को इन पट्टों की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए थे।
ऐसे में अब जमीन और पट्टों को लेकर सामने आई कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग ने पहले से संवेदनशील मामले को और राजनीतिक रंग दे दिया है।
पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल कथित रिकॉर्डिंग की वास्तविकता और प्रामाणिकता को लेकर है। धर्मेंद्र गहलोत जहां रिकॉर्डिंग को अपने दावों का आधार बता रहे हैं, वहीं प्रियशील हाड़ा इसे पूरी तरह फर्जी बता रहे हैं। ऐसे में यदि मामला आगे बढ़ता है तो ऑडियो की फॉरेंसिक जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल इस रिकॉर्डिंग के आधार पर किसी व्यक्ति की भूमिका तय करना जल्दबाजी होगी।
निकाय चुनाव के माहौल के बीच यह विवाद सामने आने से अजमेर भाजपा की अंदरूनी राजनीति भी गरमा गई है। धर्मेंद्र गहलोत पहले से ही पार्टी संगठन और स्थानीय राजनीति को लेकर सक्रिय रहे हैं। ऐसे में उनके इस दावे और पूर्व जिलाध्यक्ष प्रियशील हाड़ा के जवाब ने मामला और संवेदनशील बना दिया है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि भाजपा संगठन इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है या नहीं और कथित ऑडियो को लेकर कानूनी या प्रशासनिक स्तर पर कोई जांच आगे बढ़ती है।