



अहमदाबाद। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार, 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व अपने गांधीनगर संसदीय क्षेत्र की टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बेटियों के साथ मनाया। बच्चियों ने अमित शाह की कलाई पर राखी बांधी। इस दौरान शाह ने उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर अमित शाह ने टाइप-1 डायबिटीज से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों के सामने आने वाली चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों को जीवनभर इंसुलिन की आवश्यकता पड़ती है, जिससे परिवारों पर लगातार आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
केंद्र सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार गांधीनगर संसदीय क्षेत्र में 0 से 18 वर्ष की आयु के टाइप-1 जुवेनाइल डायबिटीज से पीड़ित बच्चों के लिए एक एकीकृत व्यवस्था स्थापित की गई है।
इसके तहत बच्चों के लिए स्क्रीनिंग, निदान, इंसुलिन एवं उपचार, मॉनिटरिंग और फॉलो-अप की व्यवस्था की गई है। संबंधित बच्चों को जीवनभर आवश्यक इंसुलिन उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी इस पहल का हिस्सा है।
अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों को जीवनभर इंसुलिन के इंजेक्शन की जरूरत होती है और इसका खर्च कई परिवारों के लिए बड़ा आर्थिक बोझ बन सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से ऐसे बच्चों को आजीवन नि:शुल्क इंसुलिन उपलब्ध कराया जा रहा है। शाह ने इस पहल को मोदी सरकार के ‘सेवा, संवेदना और सुरक्षा’ के सिद्धांतों से जोड़ा।
रक्षाबंधन के अवसर पर अमित शाह ने बेटियों के स्वास्थ्य को लेकर भी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए जनसेवा केवल जिम्मेदारी नहीं बल्कि संवेदनशील शासन का मूलमंत्र है।
उन्होंने कहा कि बेटी का स्वास्थ्य सुरक्षित होने से परिवार और समाज का भविष्य भी सुरक्षित होता है। शाह ने टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चियों के लिए नि:शुल्क इंसुलिन उपलब्ध कराने की पहल को बेटियों की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।
कार्यक्रम में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चियों ने अमित शाह को राखी बांधी। शाह ने उनसे बातचीत की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी भी ली।
रक्षाबंधन के पारंपरिक उत्सव के साथ इस कार्यक्रम में बच्चों के स्वास्थ्य और लंबे समय तक चलने वाले इलाज की आर्थिक चुनौती का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया।
टाइप-1 डायबिटीज ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता। इससे पीड़ित व्यक्ति को रक्त में शुगर का स्तर नियंत्रित रखने के लिए नियमित रूप से इंसुलिन लेना पड़ता है।
विशेष रूप से बच्चों में यह स्थिति लंबे समय तक नियमित चिकित्सा देखभाल, जांच और इंसुलिन की उपलब्धता की मांग करती है। इसी कारण गांधीनगर संसदीय क्षेत्र में स्क्रीनिंग से लेकर फॉलो-अप तक एकीकृत व्यवस्था तैयार की गई है।
अमित शाह ने इस पहल को लेकर दावा किया कि कई विकसित देश भी इस तरह की व्यवस्था लागू करने के प्रयास कर रहे हैं। इसे उन्होंने मोदी सरकार की जनस्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता से जोड़ा। यह अमित शाह का वक्तव्य है।
रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम भाई-बहन के पारंपरिक रिश्ते के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा और जरूरतमंद बच्चों को उपचार उपलब्ध कराने के संदेश से भी जुड़ा रहा।