



जयपुर। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने शारीरिक शिक्षक (PTI) भर्ती परीक्षा-2022 में डमी अभ्यर्थी, फर्जी दस्तावेज और बैकडेट में जारी BP.Ed. डिग्री के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। SOG ने मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंसेज (SSSUTMS) के कुलपति मुकेश तिवाड़ी, परीक्षा नियंत्रक और एक कंप्यूटर ऑपरेटर को गिरफ्तार किया है।
तीनों आरोपियों को मंगलवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 3 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। SOG अब विश्वविद्यालय स्तर पर डिग्री जारी करने, फीस रिकॉर्ड में हेरफेर और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
SOG की जांच में अब 66 अभ्यर्थियों की डिग्रियां भी संदिग्ध बताई जा रही हैं। एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि कहीं अन्य उम्मीदवारों को भी इसी तरीके से बैकडेट या फर्जी BP.Ed. डिग्री जारी तो नहीं की गई। मामले में डिग्रियों की वैधता, विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड, फीस लेजर, डिजिटल डेटा और संबंधित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।
एडीजी SOG विशाल बंसल के अनुसार राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) ने 25 दिसंबर 2022 को शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 आयोजित की थी।
सांचौर जिले के धानता निवासी भारमल राम पुत्र नरंगा राम ने इस भर्ती के लिए आवेदन किया था। मामले में भारमल राम को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और उसके खिलाफ जांच पूरी कर चालान अदालत में पेश किया जा चुका है।
शिकायत मिलने के बाद SOG ने जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि भारमल राम की ओर से प्रस्तुत BP.Ed. डिग्री कथित रूप से फर्जी और बैकडेट में जारी की गई थी।
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के दौरान भारमल राम ने आवेदन में दर्शाए गए विश्वविद्यालय की डिग्री के अलावा SSSUTMS, सीहोर की BP.Ed. डिग्री भी पेश की थी। SOG के अनुसार जांच में यह डिग्री भी बैकडेट में जारी होना सामने आया।
SOG ने अदालत से सर्च वारंट लेकर विश्वविद्यालय परिसर में तलाशी ली। इस दौरान संबंधित रिकॉर्ड, फीस लेजर और कंप्यूटर डेटा जब्त किया गया।
इसके बाद जब्त रिकॉर्ड और डिजिटल दस्तावेजों का फॉरेंसिक और फाइनेंशियल परीक्षण कराया गया। ऑडिट में रिकॉर्ड तैयार करने की तारीखों और फीस एंट्री में गंभीर अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है।
SOG जांच में सामने आया कि भारमल राम के नाम से विश्वविद्यालय में दो अलग-अलग फीस लेजर अकाउंट बनाए गए थे।
एजेंसी के अनुसार इन लेजर अकाउंट में एंट्री बाद की तारीख में की गईं, लेकिन रिकॉर्ड को पुरानी तारीख का दिखाया गया। इससे डिग्री और फीस रिकॉर्ड को बैकडेट में तैयार किए जाने की आशंका मजबूत हुई।
जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित परीक्षा का परिणाम 21 अक्टूबर 2022 को जारी हो चुका था, जबकि फीस लेजर में कुछ एंट्री इसके बाद की तारीखों में की गई थीं।
SOG इसे गंभीर अनियमितता मान रही है, क्योंकि इससे यह संदेह पैदा होता है कि बाद में रिकॉर्ड तैयार कर उसे पुराना दिखाने की कोशिश की गई।
SOG अब यह जांच कर रही है कि विश्वविद्यालय स्तर पर इस तरह की डिग्रियां कितने अभ्यर्थियों को जारी की गईं और इसके पीछे किन अधिकारियों, कर्मचारियों या एजेंटों की भूमिका रही।
साथ ही 66 संदिग्ध डिग्रियों से जुड़े अभ्यर्थियों, उनकी भर्ती स्थिति, फीस भुगतान और विश्वविद्यालय रिकॉर्ड का भी सत्यापन किया जा रहा है।