Monday, 24 August 2026

पूर्व विधायक अमृता मेघवाल को बड़ी राहत, पारिवारिक न्यायालय ने एकतरफा तलाक की डिक्री रद्द कर मामला फिर खोला


पूर्व विधायक अमृता मेघवाल को बड़ी राहत, पारिवारिक न्यायालय ने एकतरफा तलाक की डिक्री रद्द कर मामला फिर खोला

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जालोर। जालोर की पूर्व विधायक अमृता मेघवाल को उनके चर्चित वैवाहिक विवाद मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। पारिवारिक न्यायालय ने 7 जून 2023 को पारित विवाह विच्छेद की एकतरफा डिक्री को निरस्त करते हुए मामले को फिर से मूल नंबर पर बहाल कर दिया है।

न्यायालय ने माना कि अमृता मेघवाल को विधि के अनुरूप नोटिस की समुचित तामील नहीं हुई थी। ऐसे में उनके पति बाबूलाल मेघवाल के पक्ष में पारित एकतरफा तलाक की डिक्री को कायम रखना न्यायोचित नहीं माना गया।

आदेश 9 नियम 13 CPC के तहत मिली राहत

पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश अमर वर्मा ने आदेश 9 नियम 13 सीपीसी के तहत दायर अमृता मेघवाल की याचिका स्वीकार करते हुए एकतरफा कार्रवाई और तलाक की डिक्री को रद्द कर दिया।

अब मामला दोबारा नियमित सुनवाई के लिए बहाल कर दिया गया है। यानी अब दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही आगे निर्णय होगा।

गलत पते पर नोटिस भेजने का किया था दावा

अमृता मेघवाल ने अपनी याचिका में कहा था कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत दायर तलाक प्रकरण में उन्हें कभी विधिवत नोटिस नहीं मिला।

उनका आरोप था कि नोटिस गलत पते पर भेजा गया और बाद में समाचार पत्र में प्रकाशन के आधार पर एकतरफा कार्यवाही कर दी गई। इसी प्रक्रिया के बाद 7 जून 2023 को विवाह विच्छेद की डिक्री पारित कर दी गई थी।

13 जून को मिली जानकारी, 5 जुलाई को पहुंचीं कोर्ट

अमृता मेघवाल के अनुसार, मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने 13 जून 2023 को निर्णय की प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन किया। 14 जून को नकल मिलने के बाद उन्होंने 5 जुलाई 2023 को एकतरफा डिक्री रद्द करने के लिए अदालत में याचिका दायर की।

रिकॉर्ड देखने के बाद अदालत ने दिया फैसला

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें, केस रिकॉर्ड और नोटिस की तामील से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण किया। इसके बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि समुचित कानूनी नोटिस के अभाव में पारित एकतरफा निर्णय को जारी रखना उचित नहीं होगा।

आदेश में इस विवाद से संबंधित डी.बी. सिविल अपील संख्या 2487/2024 का भी उल्लेख किया गया। यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित रहा और 7 फरवरी 2025 को दोनों पक्षों के संयुक्त अनुरोध पर मध्यस्थता के लिए भेजा गया था।

अमृता मेघवाल ने कहा- मुझे बदनाम किया गया

फैसले के बाद अमृता मेघवाल ने पूरी कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिना पत्नी को जानकारी दिए तलाक की कार्यवाही आगे बढ़ना गंभीर मामला है।

उनका कहना है कि समाज में यह प्रचारित किया गया कि उन्होंने स्वयं तलाक लिया, जबकि वे तलाक की इच्छुक नहीं थीं। उन्होंने अपने पूर्व अधिवक्ता पर भी उन्हें गुमराह करने के आरोप लगाए।

अमृता ने कहा कि संवेदनशील वैवाहिक मामलों में यदि किसी महिला को बिना जानकारी के एकतरफा प्रक्रिया का सामना करना पड़े तो यह उसके लिए गंभीर मानसिक आघात का कारण बन सकता है।

अब क्या होगा

एकतरफा तलाक की डिक्री रद्द होने के बाद विवाह विच्छेद का मूल मामला फिर से सुनवाई में आएगा। अब दोनों पक्ष अपने-अपने साक्ष्य और तर्क अदालत के सामने रख सकेंगे।

अंतिम फैसला पारिवारिक न्यायालय की नियमित सुनवाई के बाद ही होगा।

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