



जयपुर। अपनी मांगों को लेकर पानी की टंकी, मोबाइल टावर, बिजली के पोल या हाईटेंशन टावर पर चढ़कर प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ राजस्थान पुलिस अब सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रही है। ऐसे मामलों से निपटने के लिए पुलिस नया एक्शन प्लान बना रही है, जिसमें केवल एफआईआर ही नहीं, बल्कि प्रदर्शन के दौरान खर्च हुए सरकारी संसाधनों की राशि भी संबंधित व्यक्ति से वसूलने का प्रावधान प्रस्तावित है।
डीजीपी राजीव शर्मा ने इस संबंध में मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी एडीजी क्राइम विपिन कुमार पांडेय को दी है।
यदि कोई व्यक्ति पानी की टंकी, मोबाइल टावर या हाईटेंशन टावर पर चढ़कर अपनी जान जोखिम में डालता है, तो नीचे उतरने के बाद सबसे पहले उसका मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा।
यदि मेडिकल जांच में वह व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार पाया जाता है, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का प्रावधान रखा जा सकता है। वहीं यदि वह मानसिक और शारीरिक रूप से फिट पाया जाता है तो संबंधित थाना पुलिस उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करेगी।
एफआईआर के बाद जांच अधिकारी संबंधित सभी विभागों से रिपोर्ट मांगेंगे। इसमें सिविल डिफेंस, फायर ब्रिगेड, SDRF, जलदाय विभाग, बिजली विभाग सहित वे सभी एजेंसियां शामिल होंगी, जिनके संसाधन प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल हुए।
रिपोर्ट में यह बताया जाएगा कि मौके पर कितनी गाड़ियां भेजी गईं, कितने अधिकारी-कर्मचारी तैनात रहे, कितने समय तक बिजली या पानी की सप्लाई प्रभावित रही और बचाव व्यवस्था पर कितना खर्च आया। पुलिस भी अपने वाहनों, अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की तैनाती का खर्च इस रिपोर्ट में जोड़ेगी।
प्रस्तावित व्यवस्था में प्रदर्शन के दौरान तैनात पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की उस अवधि की सैलरी, सरकारी वाहनों के ईंधन का खर्च, दमकल और एंबुलेंस के पेट्रोल-डीजल सहित अन्य संसाधनों का खर्च भी जोड़ा जा सकता है।
सभी विभागों से मिली रिपोर्ट के आधार पर कुल राशि तय की जाएगी और जिला प्रशासन की मदद से संबंधित प्रदर्शनकारी से उसकी वसूली की जाएगी।
यदि संबंधित व्यक्ति सरकारी खर्च की निर्धारित राशि जमा नहीं करता है तो वसूली की प्रक्रिया अदालत के माध्यम से आगे बढ़ाई जा सकती है।
कोर्ट से नोटिस जारी किए जा सकते हैं और न्यायालय के आदेश पर संबंधित व्यक्ति की संपत्ति के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना रहेगी। संपत्ति कुर्क करने जैसी कार्रवाई केवल सक्षम न्यायालय के आदेश और लागू कानूनी प्रक्रिया के तहत ही की जा सकेगी।
पुलिस की इस प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य मांगों को लेकर ऊंचे टावर, टंकियों और बिजली के ढांचों पर चढ़ने की बढ़ती घटनाओं को हतोत्साहित करना है। ऐसे मामलों में व्यक्ति की जान के साथ बचाव में लगे पुलिसकर्मियों और दूसरे कर्मचारियों की सुरक्षा भी जोखिम में पड़ती है।
इसके अलावा कई बार लंबी कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और तकनीकी टीमों को घंटों मौके पर तैनात रखना पड़ता है।
फिलहाल इस व्यवस्था का मसौदा तैयार किया जा रहा है। अंतिम दिशा-निर्देश जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि एफआईआर किन धाराओं में दर्ज होगी और सरकारी खर्च की गणना तथा वसूली की कानूनी प्रक्रिया किस तरह लागू की जाएगी।