Thursday, 20 August 2026

लेबर कोर्ट का बड़ा आदेश: दो IAS अधिकारियों का वेतन रोकने के निर्देश, संदीप वर्मा पर FIR भी


लेबर कोर्ट का बड़ा आदेश: दो IAS अधिकारियों का वेतन रोकने के निर्देश, संदीप वर्मा पर FIR भी

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जयपुर। जयपुर महानगर द्वितीय की लेबर कोर्ट-1 ने राजस्थान रोडवेज के एक सेवानिवृत्त परिचालक के बकाया भुगतान से जुड़े मामले में बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने तत्कालीन रोडवेज सीएमडी संदीप वर्मा और वर्तमान एमडी पुरुषोत्तम शर्मा का वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि जब तक दोनों अधिकारी निर्धारित ब्याज की राशि जमा नहीं कराते, तब तक उनका वेतन जारी नहीं किया जाए।

अदालत ने मामले में बकाया भुगतान पर 6 प्रतिशत ब्याज की राशि दोनों अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से वसूलने के निर्देश भी दिए हैं। इसके साथ ही संदीप वर्मा के खिलाफ श्रम कानूनों की अवहेलना के आरोप में एफआईआर दर्ज करने और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं।

संदीप वर्मा के खिलाफ FIR और विभागीय कार्रवाई के निर्देश

लेबर कोर्ट ने अपने आदेश में तत्कालीन रोडवेज सीएमडी संदीप वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आदेश की प्रति केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को भेजकर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई पर विचार करने को कहा गया है।

अदालत ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट को रेफरेंस भेजने के भी निर्देश दिए हैं। मामले को आदेश की पालना रिपोर्ट के लिए 1 सितंबर को फिर से सूचीबद्ध किया गया है।

कोर्ट की टिप्पणी- बिना भुगतान ओवरटाइम कराना बेगार के समान

अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी श्रमिक से निर्धारित मजदूरी दिए बिना ओवरटाइम काम कराना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत बेगार और जबरन श्रम के समान हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि श्रमिक को उसके वैधानिक भुगतान से लंबे समय तक वंचित रखना केवल सेवा विवाद का विषय नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकारों से भी जुड़ा मामला है।

124 दिनों के ओवरटाइम भुगतान को लेकर था विवाद

मामला राजस्थान रोडवेज के सेवानिवृत्त परिचालक सीताराम से जुड़ा है। सीताराम ने वर्ष 1996 से 2013 के बीच घोषित साप्ताहिक विश्राम के दिनों में किए गए 124 दिनों के काम के बदले दोगुने ओवरटाइम भुगतान की मांग की थी।

लेबर कोर्ट ने 30 जून 2026 के आदेश में उनके पक्ष में 1 लाख 9 हजार 740 रुपए की मूल देय राशि, ब्याज और मुकदमे के खर्च सहित भुगतान तय किया था। हालांकि राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की ओर से केवल 13 हजार 76 रुपए का आंशिक भुगतान किया गया।

शेष राशि पर 18 प्रतिशत ब्याज वसूलने के आदेश

अब अदालत ने जयपुर जिला कलेक्टर को निर्देश दिया है कि शेष मूल राशि 96 हजार 664 रुपए पर 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, साथ ही 25 हजार रुपए मुकदमा खर्च और 3 हजार रुपए क्षतिपूर्ति की राशि आरएसआरटीसी से भू-राजस्व के बकाया की तरह वसूल की जाए। इस ब्याज में से 6 प्रतिशत की राशि तत्कालीन सीएमडी संदीप वर्मा और वर्तमान एमडी पुरुषोत्तम शर्मा से व्यक्तिगत रूप से वसूलने के निर्देश दिए गए हैं।

संदीप वर्मा के दो सर्कुलर पर कोर्ट ने उठाए सवाल

मामले में अदालत ने उस समय जारी किए गए दो सर्कुलरों पर भी आपत्ति जताई, जब संदीप वर्मा रोडवेज के सीएमडी थे। इन सर्कुलरों के जरिए भुगतान की प्राथमिकता तय की गई थी।

कोर्ट ने इन सर्कुलरों को श्रम कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत माना। अपने स्पष्टीकरण में संदीप वर्मा ने कहा कि सर्कुलर पूर्व सीएमडी की व्यवस्था और हाईकोर्ट के विभिन्न आदेशों के आधार पर जारी किए गए थे। उन्होंने दलील दी कि कर्मचारी को भुगतान में हुई देरी के लिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि अदालत ने उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार नहीं किया।

वर्तमान एमडी पुरुषोत्तम शर्मा पर भी कार्रवाई

वर्तमान रोडवेज एमडी पुरुषोत्तम शर्मा को अदालत ने आदेश के बावजूद भुगतान सुनिश्चित नहीं करने के लिए जिम्मेदार माना है। इसी आधार पर कोर्ट ने दोनों अधिकारियों का वेतन रोकने और उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए हाईकोर्ट को लिखने के निर्देश दिए।

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