



राजस्थान कोचिंग इंस्टीट्यूट एसोसिएशन की सांकेतिक हड़ताल, लाइब्रेरी और स्टडी हॉल भी रहे बंद, संचालकों ने कहा—क्षेत्र पहले से कोचिंग गतिविधियों के लिए अधिसूचित
जयपुर। गोपालपुरा बाइपास रोड क्षेत्र में संचालित कोचिंग संस्थानों ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की कार्रवाई के विरोध में बुधवार को सांकेतिक हड़ताल की। राजस्थान कोचिंग इंस्टीट्यूट एसोसिएशन के आह्वान पर 200 से अधिक कोचिंगसंस्थान बंद रहे। इसके साथ ही कई लाइब्रेरी, स्टडी हॉल और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित रहीं।
कोचिंग संचालकों का कहना है कि JDA ने गोपालपुरा बाइपास क्षेत्र में चल रहे संस्थानों को 7 दिन के भीतर बंद करने के नोटिस दिए हैं। जेडीए की ओर से यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना में किए जाने की बात कही गई है।
राजस्थान कोचिंग इंस्टीट्यूट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि JDA ने 5 जुलाई 2021 और 26 जुलाई 2022 को गोपालपुरा बाइपास रोड को कोचिंग गतिविधियों के लिए अधिसूचित किया था।
संचालकों का कहना है कि जब क्षेत्र को पहले से कोचिंग गतिविधियों के लिए मान्यता दी गई थी, तो अब संस्थानों को बंद करने के नोटिस क्यों जारी किए जा रहे हैं।
एसोसिएशन ने दावा किया कि गोपालपुरा बाइपास रोड करीब 160 फीट चौड़ी है और यहां लगभग 250 करोड़ रुपये की लागत से फ्लाईओवर परियोजना का निर्माण चल रहा है।
पदाधिकारियों के अनुसार JDA ने वर्ष 2022 में इस क्षेत्र के लिए स्पेशल प्रोजेक्ट डेवलपमेंट प्लान भी तैयार किया था, जिसमें गोपालपुरा बाइपास को कोचिंग संस्थानों की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने का प्रावधान रखा गया था।
कोचिंग एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत याचिका के संदर्भ में कुछ तथ्यों को गलत तरीके से रखा गया, जिसके कारण वर्तमान स्थिति बनी।
एसोसिएशन ने साफ किया कि वह न्यायपालिका का पूरा सम्मान करती है, लेकिन अपने अधिकारों और तथ्यों को संवैधानिक और न्यायिक माध्यम से हाईकोर्ट के सामने रखेगी।
बुधवार की हड़ताल के दौरान केवल बड़े कोचिंग संस्थान ही नहीं, बल्कि संबंधित लाइब्रेरी, स्टडी हॉल और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां भी बंद रहीं।
इससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की नियमित कक्षाएं और स्वाध्याय व्यवस्था प्रभावित हुई। संचालकों का कहना है कि हड़ताल का उद्देश्य प्रशासन का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करना है।
राजस्थान कोचिंग इंस्टीट्यूट एसोसिएशन ने कहा कि वह किसी भी तरह के टकराव के बजाय कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखेगी।
संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि जेडीए की पूर्व अधिसूचनाओं, डेवलपमेंट प्लान और क्षेत्र की वास्तविक स्थिति से जुड़े दस्तावेजों को अदालत के सामने रखा जाएगा।