



युवा और जिताऊ चेहरों पर फोकस, डूंगरपुर में भरत नागदा को सभापति प्रत्याशी घोषित, रंधावा बोले- जो चार सीटें जिताने की जिम्मेदारी ले, उसे टिकट पर विचार होना चाहिए
जयपुर। राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय और पंचायती राज चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सोमवार को कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पार्टी मुख्यालय में करीब छह घंटे तक सांसदों, विधायकों, पूर्व प्रत्याशियों, जिला अध्यक्षों और संगठन से जुड़े करीब 500 नेताओं के साथ लंबा मंथन किया।
बैठक में प्रत्याशी चयन से लेकर संगठन की स्थिति, जिला स्तर के समीकरण, स्थानीय मुद्दों और भाजपा को चुनाव में घेरने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व ने नेताओं से खास तौर पर युवा, प्रभावी और जिताऊ चेहरों के नाम मांगे।
कांग्रेस नेतृत्व ने संगठन के 50 जिलों में चुनावी तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया। बैठक में जिला अध्यक्षों, विधानसभा प्रभारियों, पर्यवेक्षकों और विभिन्न प्रकोष्ठों से जमीनी फीडबैक लिया गया। पार्टी नेतृत्व ने साफ किया कि टिकट वितरण में स्थानीय लोकप्रियता, संगठन के प्रति सक्रियता और जीत की क्षमता को अहम माना जाएगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि संबंधित नेता अपने क्षेत्र में कितने वार्डों या सीटों पर पार्टी को प्रभावी बढ़त दिला सकता है।
बैठक का बड़ा फोकस उम्मीदवार चयन पर रहा। कांग्रेस नेतृत्व ने विभिन्न जिलों से आए नेताओं से पूछा कि उनके क्षेत्र में कौन से युवा और जिताऊ चेहरे हैं, जिन्हें निकाय और पंचायती राज चुनाव में मौका दिया जा सकता है। इस दौरान स्थानीय स्तर पर संगठन की ताकत, जातीय-सामाजिक समीकरण, वर्तमान जनप्रतिनिधियों की स्वीकार्यता और संभावित उम्मीदवारों की चुनावी क्षमता पर भी राय ली गई।
मंथन के बीच कांग्रेस ने डूंगरपुर नगर परिषद के लिए सभापति पद का चेहरा भी घोषित कर दिया। पार्टी ने पूर्व नगर अध्यक्ष भरत नागदा को डूंगरपुर नगर परिषद के लिए अपना प्रत्याशी बनाया है।यह घोषणा इस मायने में अहम मानी जा रही है कि कांग्रेस ने कई अन्य निकायों में उम्मीदवारों पर अभी मंथन जारी रखा है, जबकि डूंगरपुर में सभापति पद के लिए पहले ही नाम स्पष्ट कर दिया गया।
प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बैठक में कहा कि जो नेता अपने प्रभाव क्षेत्र में चार उम्मीदवारों को जिताने की जिम्मेदारी लेने को तैयार है, उसकी क्षमता और जिम्मेदारी को टिकट वितरण में महत्व दिया जाना चाहिए।रंधावा का जोर इस बात पर रहा कि टिकट केवल व्यक्तिगत दावेदारी के आधार पर नहीं, बल्कि संगठन को व्यापक स्तर पर चुनावी फायदा पहुंचाने की क्षमता को देखकर भी दिया जाए।
रंधावा और डोटासरा ने नेताओं को आगामी चुनाव के दौरान भाजपा को घेरने के लिए प्रमुख राजनीतिक और स्थानीय मुद्दों पर फोकस करने को कहा।बैठक में यह चर्चा भी हुई कि चुनाव अभियान को स्थानीय समस्याओं, निकायों की कार्यप्रणाली, विकास, बेरोजगारी, महंगाई और सरकार की नीतियों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित किया जाए।नेताओं को यह निर्देश भी दिया गया कि चुनावी बयानबाजी के साथ स्थानीय स्तर के वास्तविक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाए।
बैठक के दौरान रंधावा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कांग्रेस की गुटबाजी और वंदेमातरम को लेकर दिए गए बयान पर भी पलटवार किया।उन्होंने कहा कि कांग्रेस को किसी से देशभक्ति का प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। रंधावा ने तंज कसते हुए कहा कि जब केंद्र सरकार पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन नहीं रोक पा रही, तो राजस्थान में कांग्रेस की राजनीतिक आंधी कैसे रोकेगी।
बैठक में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस सहप्रभारी चिरंजी राव भी मौजूद रहे। उन्होंने भी विभिन्न जिलों और विधानसभा क्षेत्रों से आए नेताओं से फीडबैक लिया।बैठक के बाद यह साफ संकेत मिला कि कांग्रेस आगामी निकाय और पंचायती राज चुनावों में संगठनात्मक तैयारी के साथ उतरना चाहती है और टिकट वितरण को लेकर पहले से जमीनी स्तर पर डेटा जुटाने की रणनीति अपनाई जा रही है।
कांग्रेस की चुनावी रणनीति का मुख्य आधार स्थानीय स्तर पर मजबूत उम्मीदवार, संगठन की सक्रियता और भाजपा के खिलाफ प्रभावी मुद्दे तय करना बताया जा रहा है।पार्टी नेतृत्व ने जिलों को स्पष्ट संदेश दिया कि चुनाव जीतने के लिए केवल बड़े नेताओं पर निर्भर रहने के बजाय वार्ड और पंचायत स्तर पर मजबूत चेहरे सामने लाने होंगे।