



जयपुर कलेक्ट्रेट में निकाली गई वार्डवार लॉटरी, निकाय चुनाव से पहले बदले सियासी समीकरण, वार्ड नंबर 35 और 100 की कैटेगरी का अपडेट बाकी
जयपुर। जयपुर जिले में आगामी निकाय चुनाव को लेकर सोमवार को वार्डों के आरक्षण की लॉटरी निकाली गई। जयपुर कलेक्ट्रेट सभागार में जयपुर नगर निगम के कुल 150 वार्डों के लिए वर्गवार और महिला आरक्षण की प्रक्रिया की गई। आरक्षण की स्थिति सामने आने के साथ ही शहर में निकाय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों के राजनीतिक समीकरण भी बदलने लगे हैं।
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में ओबीसी के लिए 30 और अनुसूचित जाति (SC) के लिए 20 वार्ड आरक्षित हैं। वहीं अनारक्षित महिला वर्ग के लिए 30 सीटें आरक्षित रखी गई हैं। इसके अलावा एसटी तथा आरक्षित वर्गों में महिलाओं के लिए भी वार्ड निर्धारित किए गए हैं।
कलेक्ट्रेट सभागार में हुई प्रक्रिया में वार्डवार आरक्षण निर्धारित किया गया। जारी हो रही सूची के अनुसार वार्डों को अनारक्षित ओपन, अनारक्षित महिला, ओबीसी ओपन, ओबीसी महिला, एससी ओपन, एससी महिला, एसटी ओपन और एसटी महिला जैसी श्रेणियों में रखा गया है। लॉटरी की प्रक्रिया के साथ वार्डवार सूची को अपडेट किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वार्ड नंबर 35 और वार्ड नंबर 100 की कैटेगरी का विवरण अभी अपडेट होना बाकी है।
वार्ड आरक्षण की लॉटरी का सीधा असर आगामी नगर निगम चुनाव की राजनीति पर पड़ेगा। जिन वार्डों में आरक्षण की श्रेणी बदली है, वहां पहले से चुनाव की तैयारी कर रहे कई दावेदारों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है। वहीं महिला अथवा आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित हुए वार्डों में नए दावेदारों के सामने आने का रास्ता खुलेगा। राजनीतिक दल भी अब वार्डवार आरक्षण के आधार पर प्रत्याशियों के चयन और स्थानीय चुनावी समीकरणों पर मंथन शुरू करेंगे।
आरक्षण प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वार्ड महिलाओं के लिए निर्धारित होने से आगामी जयपुर नगर निगम चुनाव में महिला उम्मीदवारों की महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है। अनारक्षित महिला के लिए ही 30 सीटें आरक्षित हैं। इसके अलावा ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग में भी महिलाओं के लिए अलग-अलग वार्ड आरक्षित किए गए हैं। इस कारण नगर निगम में महिला प्रतिनिधित्व की संख्या भी महत्वपूर्ण रहने वाली है।
वार्ड आरक्षण की लॉटरी को निकाय चुनाव की तैयारियों की महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जा रहा है। आरक्षण की तस्वीर स्पष्ट होने के बाद अब राजनीतिक दलों, मौजूदा पार्षदों और संभावित उम्मीदवारों का ध्यान अपने-अपने वार्डों पर रहेगा। वार्डवार अंतिम स्थिति सामने आने के बाद यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि कौनसे मौजूदा दावेदार अपने पुराने वार्ड से चुनाव लड़ सकेंगे और किन्हें आरक्षण बदलने के कारण दूसरे राजनीतिक विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं।
