



जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने जादू कला को बढ़ावा देने और इसके संरक्षण के लिए राजस्थान सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने राज्य सरकार से जादू कला को वस्तु एवं सेवा कर (GST) से मुक्त कराने के लिए केन्द्र सरकार, प्रधानमंत्री और केंद्रीय वित्त मंत्री से सिफारिश करने का आग्रह किया। गहलोत ने कहा कि जादू केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मेहनत, तकनीक, अभिनय और प्रस्तुति से जुड़ी एक गंभीर कला है, जिसे सरकारी स्तर पर संरक्षण और प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
रविवार को जयपुर स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री चाहें तो मुख्यमंत्री आवास पर जादू का शो आयोजित कराया जा सकता है। इसमें मुख्यमंत्री के साथ पूरा मंत्रिमंडल और विधायक शामिल होकर स्वयं देख सकते हैं कि जादू की प्रस्तुति के पीछे कलाकार की कितनी मेहनत, तकनीक और अभ्यास होता है।
उन्होंने कहा कि जादूगर अपने पहनावे, अभिनय, तकनीक और प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों के सामने ऐसा वातावरण तैयार करते हैं कि असंभव दिखाई देने वाली चीज भी संभव लगने लगती है। इसलिए इस विधा को महज मनोरंजन के दायरे में नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि कला एवं सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता देकर इसके कलाकारों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
अशोक गहलोत ने जादू कला से अपने पारिवारिक जुड़ाव का जिक्र करते हुए बताया कि उनके पिता लक्ष्मण सिंह गहलोत अपने समय के जादूगर थे। वे जादू के कार्यक्रमों के सिलसिले में जापान और हांगकांग भी गए थे और उस दौरान वह स्वयं भी उनके साथ गए थे।
गहलोत ने बताया कि उनके पिता ने उस समय 'वर्ल्ड सरप्राइज शो' में हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा कि जादू की दुनिया से उनका जुड़ाव काफी पुराना है और उन्होंने करीब से देखा है कि एक जादूगर को अपनी प्रस्तुति तैयार करने के लिए कितनी मेहनत और अभ्यास करना पड़ता है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने जादू कला के संरक्षण के लिए राजस्थान के प्रत्येक जिले में जादू अकादमी स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इन अकादमियों के माध्यम से पुराने एवं अनुभवी जादूगरों की कला, तकनीक और जादू में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को संरक्षित किया जा सकता है। इसके साथ ही नई पीढ़ी को जादू कला का प्रशिक्षण देकर इस विधा को आगे बढ़ाया जा सकता है।
गहलोत ने गुजरात के एक बड़े जादूगर का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके निधन के बाद जादू से संबंधित करोड़ों रुपये का सामान बेच दिया गया। यदि उस समय जादू अकादमी जैसी कोई संस्था होती तो उस सामग्री और उपकरणों को सुरक्षित रखा जा सकता था और उनका उपयोग नई पीढ़ी के प्रशिक्षण के लिए किया जा सकता था।
गहलोत ने कहा कि वर्तमान दौर में दुनिया भर में जादू के शो आधुनिक तकनीक के साथ प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इंग्लैंड और अमेरिका सहित कई देशों में जादू कला को संस्थागत रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। भारत और विशेष रूप से राजस्थान के जादूगरों को भी आधुनिक तकनीक तथा अंतरराष्ट्रीय मंच से जोड़ने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार जादूगरों को आर्थिक और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराए तो कलाकार अपनी कला को और बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकेंगे। इससे न केवल जादू की परंपरागत कला का संरक्षण होगा, बल्कि नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए भी अवसर पैदा होंगे।
गहलोत ने राज्य सरकार से जादू कला को सांस्कृतिक विरासत के रूप में देखते हुए इसके संरक्षण, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन के लिए नीति बनाने तथा GST से राहत दिलाने के लिए केन्द्र सरकार के समक्ष पहल करने की मांग की।