



20 अगस्त को जयपुर कमिश्नरेट के घेराव की चेतावनी, राजावत बोले- भाजपा कार्यकर्ता और RSS स्वयंसेवक हूं, मेरे साथ ऐसा हो सकता है तो आम आदमी का क्या होगा
जयपुर। खुद को भाजपा कार्यकर्ता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का स्वयंसेवक बताने वाले बद्री सिंह राजावत ने जयपुर की पूर्व महापौर सौम्या गुर्जर के पति राजाराम गुर्जर सहित अन्य लोगों पर जमीन विवाद को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। राजावत का आरोप है कि उनकी निजी जमीन पर कथित रूप से सड़क बनाने और खंभे लगाने के बाद विरोध करने पर उन्हें और उनके परिवार को लगातार परेशान किया जा रहा है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
बद्री सिंह राजावत ने रविवार को जयपुर के कनकपुरा स्थित एक रिसॉर्ट में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ये आरोप लगाए। इस दौरान कांग्रेस नेता राजेंद्र सिंह गुढ़ा भी मौजूद रहे।
राजावत ने आरोप लगाया कि राजाराम गुर्जर, संदीप बक्शी और कुछ प्रभावशाली लोगों ने चार दिन पहले रातों-रात उनकी जमीन पर सड़क बनवा दी और खंभे लगा दिए। उनका दावा है कि जानकारी करने पर सामने आया कि इस काम में जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की कोई भूमिका नहीं थी। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
राजावत ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण पर सवाल उठाने के बाद उनके और परिवार के सदस्यों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई तथा उन्हें धमकाया गया। उन्होंने दावा किया कि उनके दादा और उनके छह भाइयों के परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलवाने तक की धमकी दी गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार को डराने का प्रयास किया गया, नाबालिग बच्चों के सामने अपशब्द कहे गए और घर की महिलाओं के लिए भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। राजावत ने कहा कि वे दबाव के आगे नहीं झुकेंगे और न्याय के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर थाने से भी उन्हें फोन आया था।
राजावत के अनुसार उन्होंने पूरे मामले को लेकर केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से भी बातचीत की। राजावत का दावा है कि शेखावत ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनके साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि विवादित जमीन उनके दादा और उनके छह भाइयों से संबंधित है और कुल जमीन करीब तीन बीघा थी।
राजावत ने मामले की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि जमीन से जुड़े विवाद में वर्ष 2019 में उन्होंने JDA के खिलाफ अदालत से स्टे प्राप्त किया था, जिसके बाद सड़क निर्माण का काम रुक गया था। उनका आरोप है कि इसके बावजूद वर्ष 2026 में उसी स्थान पर दोबारा सड़क बना दी गई। उन्होंने मांग की कि जांच कर यह पता लगाया जाए कि वर्ष 2026 में सड़क किसके आदेश अथवा अनुमति से बनाई गई और JDA के आधिकारिक रिकॉर्ड में संबंधित जमीन एवं सड़क को लेकर क्या स्थिति दर्ज है।
राजावत ने दावा किया कि उनके पास वर्ष 2016 से 2025 तक के गूगल मैप्स से संबंधित दस्तावेज हैं, जिनमें संबंधित स्थान पर सड़क दिखाई नहीं देती। उन्होंने कहा कि उनके पास जमीन विवाद से जुड़े अन्य दस्तावेज और रिपोर्ट भी मौजूद हैं, जिनकी जांच से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
राजावत ने कहा कि जिस सड़क के निर्माण की वैधता पर वह सवाल उठा रहे हैं, उसी सड़क की कथित तोड़फोड़ के आरोप में उनके और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। उन्होंने कहा कि यदि विवाद जमीन और सड़क को लेकर है तो इसकी जांच राजस्व एवं JDA रिकॉर्ड, जमीन के दस्तावेज, अदालत के आदेश और मौके की वास्तविक स्थिति के आधार पर होनी चाहिए।
राजावत ने यह भी आरोप लगाया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत पेश होने के बावजूद उनके खिलाफ दूसरा मुकदमा दर्ज किया गया और उन्हें फरार बताया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वह स्वयं कानूनी प्रक्रिया के तहत पेश हो चुके थे तो उन्हें फरार क्यों बताया गया। उन्होंने इस पहलू की भी जांच की मांग की।
राजावत ने कहा, "मैं भाजपा कार्यकर्ता और आरएसएस का स्वयंसेवक हूं। इसके बावजूद जयपुर में मेरे परिवार के साथ इस तरीके का व्यवहार हो सकता है तो आम आदमी की क्या स्थिति होगी। अगर एक आम आदमी के साथ ऐसा होता है तो वह अपनी बात कहां रखेगा।"
उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में जमीन के मूल दस्तावेज, JDA का रिकॉर्ड, वर्ष 2019 का कथित कोर्ट आदेश, वर्ष 2016 से 2025 तक के गूगल मैप्स संबंधी दस्तावेज और वर्ष 2026 में हुए सड़क निर्माण से संबंधित रिकॉर्ड को शामिल किया जाए।
मामले को लेकर राजपूत समाज के लोगों ने भी बद्री सिंह राजावत के समर्थन में आंदोलन की चेतावनी दी है। समाज से जुड़े लोगों के अनुसार 20 अगस्त को जयपुर पुलिस कमिश्नरेट का घेराव किया जाएगा। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत सुबह 11 बजे जयपुर के शहीद स्मारक पर राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से समाज के लोगों के एकत्रित होने की बात कही गई है। इसके बाद जयपुर पुलिस कमिश्नरेट की ओर जाने और घेराव करने की घोषणा की गई है।
राजावत और उनके समर्थकों ने मांग की है कि इससे पहले पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए।