



यूडीएच राज्यमंत्री ने कहा—पिछली निकाय चुनाव लॉटरी से इस बार ओबीसी आरक्षण में आधा प्रतिशत से भी कम अंतर, जनगणना और एसआईआर के कारण आयोग के काम पर पड़ा असर
जयपुर। यूडीएच राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्राने जिला प्रमुख और नगरीय निकायों के अध्यक्ष पदों की आरक्षण लॉटरी में ओबीसी प्रतिनिधित्व कम होने के आरोपों पर कांग्रेस नेताओं को निशाने पर लिया है। स्वतंत्रता दिवस के जिला स्तरीय समारोह के बाद मीडिया से बातचीत में खर्रा ने कहा कि ओबीसी आरक्षण को लेकर आरोप लगाने वाले नेताओं को पहले अपने कार्यकाल की भूमिका पर गौर करना चाहिए।
खर्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से ओबीसी आरक्षण का फॉर्मूला तय किए जाने के बाद करीब दो साल तक राजस्थान में कांग्रेस की सरकार रही। ऐसे में वर्तमान आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले उन नेताओं को भी जवाब देना चाहिए, जो उस समय सरकार का हिस्सा थे।
उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि आज इस मुद्दे पर सवाल उठा रहे कुछ नेता पूर्ववर्ती सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका में थे और बाद में पार्टी में भी प्रमुख पदों पर पहुंचे। खर्रा ने कहा कि उन्हें पहले अपने कार्यकाल के फैसलों की समीक्षा करनी चाहिए।
यूडीएच राज्यमंत्री ने दावा किया कि पूर्व में हुए नगरीय निकाय चुनावों के समय तत्कालीन सरकार द्वारा ओबीसी वर्ग को दिए गए आरक्षण और इस बार की लॉटरी के बीच आधा प्रतिशत से भी कम का अंतर है। उन्होंने कहा कि इसे ओबीसी के प्रतिनिधित्व में बड़ी कटौती के रूप में पेश करना उचित नहीं है और आरक्षण प्रक्रिया तय नियमों तथा उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर की गई है।
खर्रा ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में सामने आई स्थिति के पीछे एसआईआर और जनगणना प्रक्रिया को भी एक कारण बताया। उन्होंने कहा कि जब राजनीतिक ओबीसी आयोग का गठन किया गया, उसी दौरान एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हो गई। उनके अनुसार दोनों कार्यों में लगभग समान सरकारी मैनपावर की आवश्यकता होने के कारण उपलब्ध संसाधन बंट गए।
खर्रा के अनुसार ओबीसी आयोग ने जब राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी तो उसमें कुछ गड़बड़ियां सामने आईं। इसके बाद सरकार ने दोबारा गणना कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसी दौरान जनगणना की प्रक्रिया भी शुरू हो गई, जिससे एक बार फिर कर्मचारियों और अन्य संसाधनों की उपलब्धता प्रभावित हुई। खर्रा का कहना है कि इसी कारण ओबीसी संबंधी आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया पर असर पड़ा।
राजस्थान में जिला प्रमुख और नगरीय निकायों के अध्यक्ष पदों की आरक्षण लॉटरी के बाद से ओबीसी प्रतिनिधित्व को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। विपक्षी नेताओं की ओर से ओबीसी हिस्सेदारी कम होने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि राज्य सरकार की ओर से इसे निर्धारित प्रक्रिया और उपलब्ध आंकड़ों के अनुरूप बताया जा रहा है।