



जोधपुर के कार्यकर्ता सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने की नसीहत दी; बोले—व्यक्तिगत नारों के बजाय पार्टी को जिताने पर ध्यान दें
जोधपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को अनुशासन तथा एकजुटता बनाए रखने की नसीहत देते हुए कहा कि किसी को भी पार्टी की “लक्ष्मण रेखा” पार नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समाज और गरीबों के प्रति अपना दायित्व तभी पूरा कर सकेगी, जब सभी नेता मिलकर चलें और जनता को यह विश्वास दिलाएं कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है।
गहलोत शनिवार को जोधपुर के ओसवाल भवन में आयोजित कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में उनके पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने “चौथी बार गहलोत सरकार” के नारे लगाए। इस पर उन्होंने कार्यकर्ताओं को ऐसे नारे नहीं लगाने की सलाह दी।
गहलोत ने कहा कि कार्यकर्ताओं को कांग्रेस के पक्ष में काम करना चाहिए, न कि किसी एक नेता को मुख्यमंत्री बनाने के नारे लगाने चाहिए। उन्होंने कहा, “चौथी बार अशोक गहलोत के नारे मत लगाओ। पहली बार मुख्यमंत्री बना, तब भी कोई नारा नहीं लगा था। मैं गांव-गांव घूमता था और बहुत काम किए।”
उन्होंने कहा कि तीन बार मुख्यमंत्री बनना अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी और उपलब्धि है। अब पार्टी कार्यकर्ताओं का लक्ष्य कांग्रेस को मजबूत करना और चुनाव में जीत दिलाना होना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री का चयन पार्टी आलाकमान करता है। इसमें जनता की राय, चुनाव जीतकर आए विधायकों की राय और राजनीतिक परिस्थितियों सहित कई पहलुओं पर विचार किया जाता है।
उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को मुख्यमंत्री पद से जुड़े विवाद में नहीं पड़ना चाहिए। व्यक्तिगत नारेबाजी से दूसरे नेताओं के बीच गलत संदेश जा सकता है और संगठनात्मक एकता प्रभावित हो सकती है।
गहलोत ने कहा, “किसको मुख्यमंत्री बनाना है, यह हमारा काम नहीं है। यह फैसला आलाकमान करता है। जनता और विधायकों की राय सहित तमाम बातों का गुणा-भाग करने के बाद निर्णय होता है।”
गहलोत ने बताया कि जोधपुर रेलवे स्टेशन पहुंचने पर भी समर्थकों ने उनके पक्ष में जोर-जोर से नारे लगाए थे। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रा सिंह से मुलाकात के दौरान भी समर्थकों ने उन्हें चौथी बार मुख्यमंत्री बनाने की मांग की।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि चौथी, पांचवीं या छठी बार मुख्यमंत्री बनाने की बात करने का कोई औचित्य नहीं है। इस तरह के फैसले पार्टी नेतृत्व पर छोड़कर संगठन को मजबूत करने का काम किया जाना चाहिए।
गहलोत ने कहा कि सोनिया गांधी ने उनकी ओर से किसी मांग के बिना उन्हें मुख्यमंत्री बनाया था। उस समय भी दूसरी, तीसरी या चौथी बार मुख्यमंत्री बनाने के नारे नहीं लगाए गए थे।
उन्होंने कहा कि वे करीब 52 वर्षों से राजनीति में सक्रिय हैं और एनएसयूआई से अपना राजनीतिक सफर शुरू कर यहां तक पहुंचे हैं। यह यात्रा अपने आप में उनके लिए पर्याप्त और संतोषजनक है।
गहलोत ने कहा कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने उन पर विश्वास जताया। उन्होंने दावा किया कि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 21 सीटों पर आगे रहने के बावजूद पार्टी नेतृत्व ने उन्हें मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और गुटबाजी से ऊपर उठकर पार्टी के लिए काम करना चाहिए। सभी नेता और कार्यकर्ता एकजुट रहेंगे, तभी जनता के बीच मजबूत राजनीतिक संदेश जाएगा।
गहलोत के “लक्ष्मण रेखा” और व्यक्तिगत नारेबाजी से बचने वाले बयान को कांग्रेस के भीतर चल रही संगठनात्मक बयानबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने अपने संबोधन में किसी नेता का नाम लेकर प्रत्यक्ष टिप्पणी नहीं की।