



जितेंद्र सिंह के जवाब से पहले राज्यसभा में विपक्ष का वॉकआउट, सरकार ने कहा—UPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे और NTA की परीक्षाएं दायरे में
नई दिल्ली। पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर सख्ती से जुड़ा लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 गुरुवार को राज्यसभा से भी पारित हो गया। लोकसभा इसे बुधवार को मंजूरी दे चुकी थी। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी और अधिसूचना के बाद यह कानून का रूप लेगा।
राज्यसभा में लंबी बहस के बाद विधेयक ध्वनि मत से पारित हुआ। कुछ सदस्यों की ओर से प्रस्तुत संशोधन प्रस्ताव स्वीकार नहीं हुए। सरकार ने कहा कि संशोधित कानूनी ढांचा पेपर लीक, फर्जी प्रवेश पत्र, फर्जी वेबसाइट और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी सहित विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं पर कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाएगा।
बहस के समापन पर केंद्रीय कार्मिक राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सरकार की ओर से जवाब देने के लिए खड़े हुए, लेकिन इससे पहले कांग्रेस सहित विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
विपक्ष का कहना था कि सरकार ने 20 जुलाई को छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री से जवाब दिलाने की उसकी मांग स्वीकार नहीं की। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि विपक्ष को उम्मीद थी कि गृह मंत्री सदन में पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों का जवाब देंगे। इसके बाद विपक्षी सदस्य बाहर चले गए।
जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के वॉकआउट को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक का विषय देश के प्रत्येक विद्यार्थी और अभिभावक से जुड़ा है तथा विपक्ष को बहस में बने रहकर सरकार का जवाब सुनना चाहिए था। सत्ता पक्ष ने विपक्ष के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया।
सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कानून केवल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की परीक्षाओं तक सीमित नहीं होगा। इसके दायरे में संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड, इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए NTA द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाएं शामिल हैं।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा संबंधी गड़बड़ियां किसी एक राज्य अथवा एजेंसी तक सीमित नहीं हैं। इसलिए इनके खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत कानूनी व्यवस्था आवश्यक है।
राज्यसभा में चर्चा के दौरान राजद सांसद मनोज कुमार झा ने विधेयक को अपर्याप्त बताते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को समाप्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि केवल दंड बढ़ाने वाले सुधारों से समस्या का समाधान नहीं होगा और गड़बड़ियों के मूल स्रोत पर कार्रवाई करनी होगी।
मनोज झा ने कहा कि बीमारी के स्रोत के रूप में NTA को समाप्त कर “बंगाल की खाड़ी में फेंक देना चाहिए।” उन्होंने सरकार से परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की संरचना, जवाबदेही और कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव करने की मांग की।
विपक्षी सांसदों ने चर्चा के दौरान कहा कि कठोर सजा और भारी जुर्माने के साथ परीक्षा प्रणाली में संस्थागत सुधार भी आवश्यक हैं। उन्होंने प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही, समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर और प्रभावित विद्यार्थियों को राहत देने की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।
समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने कहा कि केवल सजा बढ़ाने से अपराध समाप्त नहीं होगा। वहीं अन्य विपक्षी सदस्यों ने NTA की कार्यप्रणाली और परीक्षा व्यवस्था के केंद्रीकरण पर सवाल उठाए।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि संशोधन विधेयक परीक्षा संबंधी कदाचार के विरुद्ध सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए छह विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें काम कर रही हैं और आगे और अदालतें स्थापित करने की योजना है।
सरकार के अनुसार उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति की 46 में से 35 सिफारिशों को लागू किया जा चुका है। विधेयक का उद्देश्य विद्यार्थियों की मेहनत की सुरक्षा के साथ परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता बढ़ाना है।