



रेरा का आदेश: पूर्व आदेशों की पूर्ण पालना नहीं होने पर प्रवर्तन आवेदन स्वीकार, ब्याज और मूलधन का प्राधिकरण ने किया पुनर्गणना
जयपुर। राजस्थान रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण ने मैसर्स वी.एन. बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड को शिकायतकर्ता रामवीर चौधरी के बकाया ₹6,60,519 का भुगतान 30 दिन के भीतर करने के निर्देश दिए हैं। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता नमन यादव ने पक्ष रखा।
राजस्थान रेरा की अध्यक्ष वीणु गुप्ता ने शिकायत संख्या RAJ-RERA-C-N-2020-3602, रामवीर चौधरी बनाम वी.एन. बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड में 29 जुलाई 2026 को आदेश पारित किया। प्रकरण और आदेश की तारीख राजस्थान रेरा की आधिकारिक आदेश सूची में भी दर्ज है।
शिकायतकर्ता ने रेरा के पूर्व आदेशों की पूर्ण पालना नहीं होने पर रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 40 के साथ पठित धारा 63 के अंतर्गत प्रवर्तन आवेदन प्रस्तुत किया था।
प्राधिकरण ने इससे पहले 5 जनवरी 2023 और 25 मई 2023 को आदेश पारित कर प्रमोटर को शिकायतकर्ता की जमा राशि में से 10 प्रतिशत की कटौती करने के बाद शेष राशि निर्धारित ब्याज सहित लौटाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद तय समय में संपूर्ण राशि का भुगतान नहीं किया गया।
कार्यवाही के दौरान बिल्डर ने बकाया राशि का भुगतान 12 मासिक किस्तों में करने का शपथ-पत्र दिया था। इसके बाद कुछ राशि का भुगतान किया गया, लेकिन कई किस्तें निर्धारित समय पर जमा नहीं हुईं।
शिकायतकर्ता और प्रमोटर की ओर से पेश भुगतान गणनाओं में अंतर पाए जाने पर प्राधिकरण ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर स्वतंत्र रूप से देय राशि की पुनर्गणना की।
रेरा ने स्पष्ट किया कि प्रमोटर द्वारा किस्तों में किए गए प्रत्येक भुगतान को पहले भुगतान की तारीख तक अर्जित ब्याज में समायोजित किया जाएगा। ब्याज के समायोजन के बाद बची राशि को ही मूलधन में घटाया जाएगा।
प्राधिकरण ने पाया कि शिकायतकर्ता ने प्रमोटर को कुल ₹24,64,509 जमा किए थे। इस राशि पर 15 अप्रैल 2018 से 15 जुलाई 2026 तक 10.60 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की गणना के बाद कुल देयता ₹42,80,886 निर्धारित की गई।
आदेश के अनुसार प्रमोटर ने अलग-अलग किस्तों में कुल ₹36,20,364 का भुगतान किया। ब्याज और मूलधन के नियमानुसार समायोजन के बाद ₹6,60,519 की राशि बकाया पाई गई।
रेरा ने बिल्डर को आदेश की तारीख से 30 दिन के भीतर यह राशि शिकायतकर्ता को चुकाने के निर्देश दिए। प्राधिकरण द्वारा तैयार गणना पत्र को भी मूल आदेश के निष्पादन का अभिन्न हिस्सा माना गया है।
निर्धारित अवधि में आदेश की पालना नहीं होने पर शिकायतकर्ता कानून के तहत आगे प्रवर्तन की मांग कर सकता है। मौजूदा आदेश में प्राधिकरण ने भुगतान की राशि, ब्याज की गणना और उसके समायोजन की प्रक्रिया स्पष्ट कर दी है।




