Thursday, 30 July 2026

राहुल-प्रियंका पर भाजपा सांसद सतीश पूनिया का हमला, बोले—गहलोत सरकार में पेपर लीक पर क्यों नहीं दिया धरना


राहुल-प्रियंका पर भाजपा सांसद सतीश पूनिया का हमला, बोले—गहलोत सरकार में पेपर लीक पर क्यों नहीं दिया धरना

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प्रह्लाद जोशी पर की गई टिप्पणियों का किया विरोध; कांग्रेस को मुद्दा आधारित विपक्ष की भूमिका निभाने की नसीहत

नई दिल्ली। भाजपा के राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया ने पेपर लीक और महिला अपराधों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल किया कि राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान पेपर लीक की घटनाएं सामने आने पर राहुल गांधी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री के विरुद्ध धरना क्यों नहीं दिया और उन्हें पद से हटाने की मांग क्यों नहीं की।

सतीश पूनिया ने बुधवार को संसद भवन के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान ये बातें कहीं। उनका बयान ऐसे समय सामने आया है, जब संसद में पेपर लीक से संबंधित विधेयक और प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों के विरुद्ध कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस चल रही है। राहुल गांधी ने लोकसभा में विद्यार्थियों पर कथित कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री पर सवाल उठाए थे।

गहलोत सरकार के कार्यकाल को लेकर उठाए सवाल

पूनिया ने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस शासन के दौरान कई भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और इन घटनाओं से युवाओं को गंभीर नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि कुछ युवाओं ने निराश होकर आत्महत्या तक की, लेकिन उस समय राहुल गांधी ने अशोक गहलोत सरकार के विरुद्ध कोई बड़ा आंदोलन नहीं किया।

उन्होंने कहा, “जब राजस्थान में 17 पेपर लीक हुए और यहां बच्चों ने आत्महत्या की, उस समय राहुल गांधी अशोक गहलोत के खिलाफ धरने पर क्यों नहीं बैठे? उन्हें कुर्सी से क्यों नहीं हटाया?”

यह भाजपा नेता का राजनीतिक आरोप है। पेपर लीक की घटनाओं और उनसे जोड़ी गई आत्महत्याओं की संख्या अलग-अलग मामलों एवं आधिकारिक जांच के आधार पर ही निर्धारित हो सकती है।

प्रियंका गांधी के नारे पर भी किया पलटवार

सतीश पूनिया ने प्रियंका गांधी के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ नारे का उल्लेख करते हुए राजस्थान में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों को लेकर उनकी भूमिका पर सवाल उठाया।

उन्होंने दावा किया कि अशोक गहलोत सरकार के समय राजस्थान में प्रतिदिन औसतन 17 दुष्कर्म की घटनाएं होती थीं, लेकिन प्रियंका गांधी ने प्रदेश में आकर सरकार के विरुद्ध विरोध नहीं किया। यह आंकड़ा पूनिया का राजनीतिक दावा है और इसे आधिकारिक अपराध आंकड़ों की स्वतंत्र व्याख्या के बिना स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

पूनिया ने कहा कि देश की जनता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की राजनीति तथा उनके सार्वजनिक आचरण को देख रही है।

प्रह्लाद जोशी के समर्थन में उतरे पूनिया

भाजपा सांसद ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी पर राहुल और प्रियंका गांधी की ओर से की गई टिप्पणियों का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को राजनीति विरासत में मिली है, जबकि प्रह्लाद जोशी ने लंबे राजनीतिक संघर्ष, मेहनत और संगठनात्मक कार्य के माध्यम से अपना स्थान बनाया है।

पूनिया ने कहा कि जोशी ने सांसद और केंद्रीय मंत्री के रूप में स्वयं को साबित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने व्यक्तिगत टिप्पणी करके संसदीय बहस को मूल मुद्दे से भटकाने का प्रयास किया।

प्रियंका गांधी ने लोकसभा में प्रह्लाद जोशी पर बिलकिस बानो मामले के दोषियों की रिहाई का समर्थन करने का आरोप लगाया था। सत्ता पक्ष ने आरोप का विरोध किया और उनसे प्रमाण प्रस्तुत करने की मांग की। विवादित टिप्पणी के कुछ अंश बाद में लोकसभा की कार्यवाही से हटा दिए गए।

‘विपक्ष को प्रशिक्षण की जरूरत’

पूनिया ने कांग्रेस की संसदीय रणनीति की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी और उसके नेताओं को प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए बेहतर प्रशिक्षण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का दायित्व सरकार को चेताना, जनहित के मुद्दे उठाना और नीतिगत कमियों पर सार्थक बहस करना है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल पहले सदन की कार्यवाही से दूर रहे और जब बहस में शामिल हुए तो मुद्दा आधारित चर्चा के बजाय कार्यवाही को दूसरी दिशा में ले जाने का प्रयास किया।

पूनिया ने कहा कि देश की जनता विपक्ष के इस आचरण को समझ रही है और ऐसी राजनीति से कांग्रेस को कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलेगा।

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