



राज्यसभा में सरकार का जवाब—इंजन में बदलाव की जरूरत नहीं, कुछ वाहनों के माइलेज में 3 से 5 प्रतिशत तक कमी संभव
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ पुराने बीएस-3 वाहनों में रबर से बने पार्ट्स और गैस्केट बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी।
गडकरी ने बताया कि 1 अप्रैल 2005 से लागू बीएस-3 मानकों के तहत निर्मित और वर्ष 2016 से पहले बने कुछ वाहनों के रबर पार्ट्स तथा गैस्केट ई-20 ईंधन के लंबे इस्तेमाल से प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि ऐसे पार्ट्स नियमित सर्विसिंग के दौरान आसानी से बदले जा सकते हैं और इसके लिए वाहन के इंजन में किसी बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ई-20 पेट्रोल पर किए गए अध्ययनों में पुराने वाहनों सहित दोपहिया और चारपहिया वाहनों के प्रदर्शन में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया। जांच के दौरान वाहन स्टार्ट होने, संचालन क्षमता, धातु एवं प्लास्टिक के पार्ट्स की अनुकूलता और सामान्य टूट-फूट जैसे पहलुओं का अध्ययन किया गया।
सरकार के अनुसार ई-20 ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों में असामान्य टूट-फूट, बड़े स्तर पर इंजन खराब होने या टिकाऊपन में गंभीर कमी के प्रमाण नहीं मिले हैं। पुराने वाहनों के इंजन को ई-20 पेट्रोल के अनुकूल बनाने के लिए अलग से संशोधित कराने की जरूरत भी नहीं बताई गई है।
गडकरी ने बताया कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने संयुक्त रूप से ई-20 ईंधन के प्रभाव का अध्ययन किया।
इन अध्ययनों में इंजन की टिकाऊपन, ईंधन प्रणाली, सामग्री की अनुकूलता, जंग लगने की आशंका, वाहन संचालन, उत्सर्जन, माइलेज और समग्र प्रदर्शन सहित विभिन्न मानकों की जांच की गई। सरकार ने कहा कि ई-20 लागू करने से पहले प्रयोगशाला परीक्षणों के साथ वास्तविक परिस्थितियों में भी इसका परीक्षण किया गया था।
केंद्रीय मंत्री ने ई-20 पेट्रोल से माइलेज घटने की आशंकाओं पर कहा कि वाहन की ईंधन दक्षता केवल पेट्रोल के प्रकार पर निर्भर नहीं करती। ड्राइविंग की शैली, सड़क की स्थिति, वाहन का रखरखाव, टायरों में हवा, इंजन की स्थिति और यातायात जैसे कई कारक भी माइलेज को प्रभावित करते हैं।
हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय के आधिकारिक स्पष्टीकरण में स्वीकार किया गया है कि कुछ वाहनों में ई-20 पेट्रोल से ईंधन दक्षता में करीब 3 से 5 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है। सरकार का कहना है कि इसे वाहन के समग्र प्रदर्शन अथवा इंजन की खराबी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
ई-20 ऐसा ईंधन है, जिसमें 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है। सरकार इसे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन घटाने की नीति के हिस्से के रूप में बढ़ावा दे रही है।
सरकार का दावा है कि ई-20 की ओर बदलाव चरणबद्ध तरीके से किया गया और वाहन निर्माताओं, तेल कंपनियों तथा तकनीकी संस्थानों से परामर्श के बाद इसे लागू किया गया। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि बड़े स्तर पर पुराने वाहनों में ई-20 के कारण इंजन खराब होने या पार्ट्स की असामान्य क्षति के मामले सामने नहीं आए हैं।
बीएस-3 और वर्ष 2016 से पहले बने वाहन रखने वाले लोगों को नियमित सर्विसिंग के दौरान ईंधन पाइप, सील, गैस्केट और रबर से बने अन्य पार्ट्स की जांच कराने की सलाह दी जा सकती है। किसी तरह की लीकेज, पेट्रोल की गंध, स्टार्ट होने में परेशानी अथवा प्रदर्शन में असामान्य बदलाव दिखने पर अधिकृत सर्विस सेंटर से जांच कराना उचित होगा।