



प्रतियोगी परीक्षाओं में लगाए वाहनों के बिल पास करने के बदले डेढ़ लाख रुपये मांगने का आरोप, अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच
जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बुधवार को जयपुर कलेक्ट्रेट कार्यालय में कार्रवाई करते हुए अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट-पूर्व के निजी सहायक मुकेश कुमार को एक लाख रुपये की कथित रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी पर प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान जिला प्रशासन को उपलब्ध कराए गए वाहनों के लंबित बिल पास करने और फाइल आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है।
एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता के अनुसार एक वाहन उपलब्ध कराने वाली फर्म के संचालक ने ब्यूरो को शिकायत दी थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसकी फर्म ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान जिला प्रशासन को वाहन उपलब्ध कराए थे, लेकिन भुगतान से संबंधित बिल लंबित थे।
आरोप है कि एडीएम ईस्ट के पीए ने इन बिलों को पास कराने और फाइल आगे बढ़ाने के बदले डेढ़ लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि रिश्वत नहीं देने पर उसे लगातार परेशान किया जा रहा था और भुगतान की प्रक्रिया रोकी हुई थी।
एसीबी अधिकारियों के अनुसार शिकायत मिलने के बाद डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के निर्देशन में उसका सत्यापन कराया गया। सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने का दावा किया गया, जिसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनील सिहाग के नेतृत्व में ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई गई।
बुधवार को शिकायतकर्ता जैसे ही आरोपी को एक लाख रुपये देने पहुंचा, एसीबी की टीम ने उसे कथित रिश्वत राशि स्वीकार करते हुए पकड़ लिया। आरोपी के कब्जे से रिश्वत की राशि बरामद किए जाने की जानकारी दी गई है।
एसीबी के अनुसार शिकायत के सत्यापन के दौरान आरोपी ने परिवादी से कहा था, “दोस्ती अपनी जगह और काम अपनी जगह। मुझे ऊपर भी देने होते हैं।” इस कथित बातचीत के आधार पर ब्यूरो अब यह जांच कर रहा है कि आरोपी ने रिश्वत की मांग केवल अपने लिए की थी या इसमें किसी अन्य अधिकारी अथवा कर्मचारी की भी भूमिका थी।
हालांकि अन्य अधिकारियों की संलिप्तता अभी जांच का विषय है और एसीबी की जांच पूरी होने से पहले किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका को स्थापित नहीं माना जा सकता।
गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है। उसके कार्यालय और अन्य संबंधित ठिकानों की तलाशी लिए जाने तथा दस्तावेजों और लेन-देन के रिकॉर्ड की जांच किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
एसीबी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान लगाए गए वाहनों के अन्य बिलों के भुगतान में भी किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी या नहीं। शिकायतकर्ता की फर्म से संबंधित पूरी फाइल और भुगतान प्रक्रिया की भी जांच की जा सकती है।
आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।