



प्रधानमंत्री से लेकर शिक्षा निदेशक तक लगाई गुहार, अभिभावकों को केवल आश्वासन और ठोकरें मिलीं—अभिषेक जैन बिट्टू
जयपुर। राजस्थान में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में निःशुल्क प्रवेश की प्रक्रिया को लेकर संयुक्त अभिभावक संघ ने गंभीर सवाल उठाए हैं। संघ का दावा है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ऑनलाइन लॉटरी जारी हुए करीब 140 दिन बीत चुके हैं, लेकिन लगभग 1.80 लाख चयनित विद्यार्थियों को अब तक विद्यालयों में प्रवेश नहीं मिल पाया है।
राजस्थान में आरटीई प्रवेश के लिए 12 मार्च 2026 को केंद्रीकृत ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से विद्यार्थियों का वरीयता क्रम जारी किया गया था। इसके बाद प्रथम चरण का विद्यालय आवंटन 17 मार्च और दूसरे चरण का आवंटन 7 अप्रैल को निर्धारित था। प्रदेश के 36 हजार से अधिक निजी विद्यालयों के लिए 6.25 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे।
संयुक्त अभिभावक संघ के अनुसार लॉटरी प्रक्रिया में करीब 2.40 लाख विद्यार्थियों का चयन किया गया था, जिन्हें निजी विद्यालयों में निःशुल्क प्रवेश दिया जाना था। संघ का आरोप है कि इनमें से लगभग 1.80 लाख बच्चों की प्रवेश प्रक्रिया अब भी लंबित है। इन आंकड़ों की शिक्षा विभाग की ओर से स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
इस मामले को लेकर संयुक्त अभिभावक संघ ने मंगलवार को प्रारंभिक शिक्षा निदेशक, बीकानेर को संबोधित ज्ञापन डाक और ई-मेल के माध्यम से भेजा। ज्ञापन में प्रवेश से वंचित सभी पात्र विद्यार्थियों को तत्काल स्कूल आवंटित कर प्रवेश दिलाने और नियमों का पालन नहीं करने वाले निजी विद्यालयों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल, प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू और प्रभावित अभिभावक मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे जयपुर के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय भी पहुंचे। जिला शिक्षा अधिकारी की अनुपस्थिति में प्रतिनिधिमंडल ने एडीओ संजय यादव से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा और शिक्षा निदेशक के नाम ज्ञापन की प्रति सौंपी।
संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से प्रारंभ हो चुका है और ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद विद्यालयों में नियमित पढ़ाई भी जारी है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में आरटीई चयनित बच्चे प्रवेश की प्रतीक्षा में हैं।
उन्होंने कहा कि प्रवेश में लगातार हो रही देरी के कारण आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चे अन्य विद्यार्थियों की तुलना में पढ़ाई में पीछे होते जा रहे हैं। विद्यालय में प्रवेश मिलने के बाद भी उनके लिए छूटी हुई पढ़ाई की भरपाई करना कठिन होगा।
अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा, “प्रदेश के अभिभावक पिछले कई महीनों से निजी विद्यालयों, ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों, जिला शिक्षा अधिकारियों और शिक्षा विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा निदेशक सहित विभिन्न अधिकारियों को पत्र एवं ज्ञापन भेजे गए, लेकिन अभिभावकों को समाधान के स्थान पर केवल आश्वासन मिले हैं।”
संघ ने आरोप लगाया कि कई निजी विद्यालय आरटीई के तहत आवंटित विद्यार्थियों के दस्तावेज स्वीकार नहीं कर रहे हैं अथवा अलग-अलग आपत्तियां लगाकर प्रवेश प्रक्रिया लंबित रख रहे हैं। कुछ मामलों में अभिभावकों को बार-बार विद्यालय और शिक्षा विभाग के कार्यालय भेजा जा रहा है।
इससे पहले भी संयुक्त अभिभावक संघ ने लंबित आरटीई प्रवेशों को लेकर शिक्षा संकुल में प्रदर्शन किया था। मई 2026 में संगठन ने दावा किया था कि एक लाख से अधिक चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं मिल पाया है और विभाग को समाधान के लिए समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।
संघ का कहना है कि निजी विद्यालयों द्वारा प्रवेश से इनकार किए जाने पर संबंधित जिला और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। शिकायत प्राप्त होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से अभिभावकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) के तहत निर्धारित श्रेणी के निजी गैर-सहायता प्राप्त विद्यालयों को प्रवेश स्तर की कक्षा में कम से कम 25 प्रतिशत सीटों पर कमजोर वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को प्रवेश देना होता है। ऐसे विद्यार्थियों को प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
संघ ने कहा कि ऑनलाइन प्रक्रिया में पात्र पाए जाने और विद्यालय आवंटित होने के बाद भी बच्चे को प्रवेश नहीं मिलना अधिनियम के उद्देश्य को विफल करता है। सरकार और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी केवल लॉटरी जारी करने तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि प्रत्येक पात्र बच्चे का वास्तविक प्रवेश सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
संयुक्त अभिभावक संघ ने शिक्षा निदेशक को भेजे ज्ञापन में मांग की है कि आरटीई में चयनित एवं पात्र पाए गए सभी विद्यार्थियों को तत्काल निजी विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाए।
प्रवेश से इनकार करने या प्रक्रिया को जानबूझकर लंबित रखने वाले विद्यालयों के विरुद्ध आरटीई अधिनियम और मान्यता संबंधी नियमों के तहत कठोर कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही राज्य स्तर पर लंबित प्रवेशों की नियमित निगरानी के लिए समयबद्ध व्यवस्था बनाई जाए।
संघ ने यह भी मांग की कि प्रत्येक जिले से लंबित आवेदनों, विद्यालयवार आपत्तियों और प्रवेश से इनकार किए जाने के कारणों की रिपोर्ट ली जाए। पात्रता पूरी करने वाले किसी भी विद्यार्थी का शैक्षणिक वर्ष प्रशासनिक देरी या विद्यालय की मनमानी के कारण प्रभावित नहीं होना चाहिए।
संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कहा कि यदि तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो हजारों गरीब और जरूरतमंद बच्चों का पूरा शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो सकता है। इसकी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों की होगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि लंबित प्रवेशों का शीघ्र समाधान नहीं होने पर संघ प्रदेशभर के प्रभावित अभिभावकों के साथ व्यापक जनआंदोलन शुरू करेगा। संगठन जिला स्तर पर प्रदर्शन, धरना और जवाबदेही अभियान चलाने पर भी विचार कर रहा है।